इजराइल ने ग्रेटा थनबर्ग को लेकर गाजा जा रहे सहायता जहाज ‘मेडेलिन’ को रोका, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कार्रवाई पर उठे सवाल
9 जून 2025, सोमवार – इजराइली नौसेना ने रविवार को गाजा जा रहे सहायता जहाज को रोक दिया। इस जहाज ‘मेडेलिन‘ पर विश्व प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग समेत कई अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ता सवार थे। यह जहाज फ्रीडम फ्लोटिला गठबंधन (एफएफसी) द्वारा चलाए जा रहे मानवीय मिशन का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य गाजा में फंसे नागरिकों तक खाद्य सामग्री, दवाएं और शिशु फार्मूला पहुंचाना था।
यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब गाजा में युद्ध, भूख और मानवीय संकट की स्थिति अपने चरम पर है, वहीं इजराइल की सुरक्षा नीतियों और समुद्री नाकेबंदी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बहस भी तेज हो रही है।

‘मेडेलिन’ का क्या हुआ?
फ्रीडम फ्लोटिला गठबंधन के अनुसार, इजराइली नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जहाज पर कार्रवाई की और उसे जबरन इजराइली बंदरगाह अशदोद की ओर ले गई। जहाज पर सवार दर्जनों कार्यकर्ताओं में ग्रेटा थनबर्ग और यूरोपीय संसद की फ्रांसीसी सदस्य रीमा हसन शामिल थीं।
इज़राइली विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि जहाज को “गाजा के पास नौसैनिक क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले रोका गया” और “इसकी यात्रा को अवैध, खतरनाक और वैध मानवीय सहायता प्रयासों में बाधा डालने वाला माना गया।”
ग्रेटा थनबर्ग और अन्य कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
कार्यकर्ताओं द्वारा साझा किए गए वीडियो और बयानों में दावा किया गया कि जहाज पर हमला किया गया, आंखों में जलन पैदा करने वाले सफेद पदार्थ का छिड़काव किया गया और रेडियो पर मतिभ्रम वाली आवाज़ें बजाई गईं।
पर्यावरण न्याय की वैश्विक प्रतीक ग्रेटा थनबर्ग ने पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो में कहा:
“यदि आप यह वीडियो देख रहे हैं, तो हमें अंतर्राष्ट्रीय जल में रोका गया और हिरासत में लिया गया। हमारा उद्देश्य केवल गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाना था।”
फ्रीडम फ्लोटिला गठबंधन ने दावा किया कि यह कार्रवाई “अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” थी और इज़राइल ने सहायता को भी जब्त कर लिया था।
इज़राइल का पक्ष
इज़राइली अधिकारियों ने कहा कि यह मिशन महज़ एक “प्रचार स्टंट” था और इसे “सेल्फ़ी बोट” बताया, उन्होंने कहा कि सहायता पहुँचाने के लिए निर्दिष्ट मानवीय मार्ग उपलब्ध थे। इज़राइली रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि “मेडेलिन” को गाजा पहुँचने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अशदोद बंदरगाह पर पहुँचने के बाद, सभी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, उन्हें पानी और भोजन दिया गया और उनसे पूछताछ की गई। इज़राइली विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि जहाज़ पर मौजूद सभी सामान की जाँच के बाद उसे मानवीय सहायता के तौर पर गाजा पहुँचाया जाएगा।
गाजा में मानवीय संकट की पृष्ठभूमि
गाजा पिछले कई महीनों से मानवीय संकट की भयावह स्थिति में है। युद्ध, घेराबंदी और सीमित सहायता ने इसके 21 मिलियन निवासियों को भुखमरी और स्वास्थ्य संकट के जोखिम में डाल दिया है। अप्रैल में संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में पाँच में से एक व्यक्ति भुखमरी के जोखिम में है।
यद्यपि मई के अंत से कुछ मानवीय सहायता सीमित तरीके से गाजा में पहुँच रही है, लेकिन राहत एजेंसियों का कहना है कि यह ज़रूरतों से बहुत कम है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
फ्रांस सरकार ने पुष्टि की है कि उसके छह नागरिक जहाज पर सवार थे। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जल्द से जल्द उनकी सुरक्षित वापसी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा के खतरों के बारे में पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी गाजा में मानवीय सहायता के प्रवेश को सुनिश्चित करने की मांग की है, जबकि इजरायल अपनी सुरक्षा चिंताओं और क्षेत्रीय नियंत्रण की नीति का हवाला दे रहा है।
निष्पक्ष दृष्टिकोण
यह घटना अंतरराष्ट्रीय राजनीति, मानवीय मूल्यों और सुरक्षा चिंताओं के बीच टकराव का नवीनतम उदाहरण बन गई है।
एक ओर, दुनिया भर के कार्यकर्ता गाजा में चल रही भूख, स्वास्थ्य संकट और मदद की सख्त जरूरत के बारे में अपनी आवाज उठा रहे हैं।
दूसरी ओर, इजरायल आतंकवाद और सुरक्षा खतरों का हवाला देते हुए नौसैनिक नाकाबंदी को जरूरी मानता है।
इस विवाद में ग्रेटा थनबर्ग जैसे लोकप्रिय चेहरों की भागीदारी ने इस मुद्दे को और वैश्विक बना दिया है। उनकी मौजूदगी ने निश्चित रूप से यह सवाल उठाया है कि क्या अब मानवीय सहायता पहुंचाने के प्रयास को राजनीतिक या सैन्य हस्तक्षेप के कारण बाधित किया जाना चाहिए?
‘मेडेलिन’ पर आगे क्या होगा?
अब तक मिली जानकारी के अनुसार:
जहाज पर सवार सभी कार्यकर्ताओं को इजराइल में पूछताछ के बाद उनके देशों को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है।
इजराइल ने दावा किया है कि जहाज पर मौजूद सहायता सामग्री को मानवीय चैनलों के जरिए गाजा पहुंचाया जा रहा था।
फ्रीडम फ्लोटिला गठबंधन और अन्य संगठनों ने इस घटना की निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन बताया है।
प्रदर्शन और विरोध
इजराइल में कुछ कार्यकर्ताओं ने अशदोद बंदरगाह पर जहाज को जब्त किए जाने का विरोध किया। उन्होंने “मेडेलिन को रिहा करो”, “गाजा में नरसंहार बंद करो” जैसे नारे लगाए। साथ ही स्थानीय नागरिकों और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस और तीखी प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं।
निष्कर्ष:
गाजा में मानवीय संकट और ग्रेटा थनबर्ग की भागीदारी ने इस मिशन को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बना दिया है। यह मामला अब केवल सहायता मिशन नहीं रह गया है, बल्कि यह इस बात की भी परीक्षा है कि दुनिया को किस तरह मानवाधिकारों, सुरक्षा नीति और उपयोगकर्ता व्यवहार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।
इस घटना ने न केवल गाजा की स्थिति को एक बार फिर दुनिया के ध्यान में लाया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि मानवीय कार्यों के पीछे राजनीतिक बहस कितनी जटिल और संवेदनशील हो सकती है।
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Author: kamalkant
कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।










