26/11 हमले के आरोपी तहव्वुर राणा का सनसनीखेज खुलासा- हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा, पाक सेना और आईएसआई की थी साजिश

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

26/11 हमले के आरोपी तहव्वुर राणा का सनसनीखेज खुलासा- मैं पाक सेना का एजेंट था, हेडली को लश्कर-ए-तैयबा ने ट्रेनिंग दी थी, हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा, पाक सेना और आईएसआई की थी साजिश :

____________

मुंबई/नई दिल्ली –
भारत को हिलाकर रख देने वाले 26/11 हमले की साजिश में एक बार फिर बड़ा खुलासा हुआ है। इस बार यह खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि खुद मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर राणा ने किया है, जिसे हाल ही में अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। मुंबई आतंकी हमले के इस दोषी ने पूछताछ में कबूल किया है कि वह पाक सेना का ‘विश्वसनीय एजेंट’ था और उसने डेविड हेडली के साथ मिलकर हमले की योजना बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

राणा ने बताया कि लश्कर-ए-तैयबा ने हेडली को आतंकी ट्रेनिंग दी थी और यह आतंकी संगठन किसी विचारधारा से नहीं बल्कि ‘जासूसी नेटवर्क’ की तरह काम करता है। उसके कबूलनामे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि इस हमले के पीछे न केवल आतंकवादी बल्कि पाकिस्तान की सरकारी मशीनरी – खास तौर पर सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई – का हाथ था।

—कौन है तहव्वुर राणा ?

तहव्वुर हुसैन राणा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चिचावतनी का रहने वाला है। 64 वर्षीय राणा ने 1986 में रावलपिंडी के पाकिस्तान आर्मी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की और फिर बतौर कैप्टन डॉक्टर पाक सेना में शामिल हो गया। वह बलूचिस्तान, सिंध, बहावलपुर और सियाचिन जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात रहा। सियाचिन में तैनाती के दौरान उसे पल्मोनरी एडिमा हो गई, जिसके कारण वह ड्यूटी से अनुपस्थित रहने लगा और सेना ने उसे “भगोड़ा” घोषित कर दिया।

राणा ने बताया कि डेविड हेडली ने उसे भरोसा दिलाया था कि अगर वह आतंकी योजना में शामिल हो गया तो वह उसका सैन्य रिकॉर्ड साफ करवाने में मदद करेगा। इसी लालच के चलते वह इस साजिश का हिस्सा बन गया।

—लश्कर-ए-तैयबा की ट्रेनिंग और हेडली का नेटवर्क

तहव्वुर राणा ने खुलासा किया कि डेविड हेडली ने 2003 से 2004 के बीच लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकी ट्रेनिंग कैंपों में हिस्सा लिया था। इन कैंपों का नाम “आम” और “खास” था। हेडली ने खुद कहा कि लश्कर-ए-तैयबा एक “जासूसी नेटवर्क” की तरह काम करता है जो गुप्त जानकारी इकट्ठा करता है।

राणा और हेडली ने 1974-1979 के बीच पाकिस्तान के कैडेट कॉलेज हसन अब्दल में साथ-साथ पढ़ाई की। राणा ने यह भी कहा कि हेडली ने अपना बचपन अमेरिका और पाकिस्तान में बिताया और बाद में वह अमेरिकी नागरिक बन गया।

—मुंबई आतंकी हमले से पहले की तैयारियां

राणा ने यह भी कहा कि उसने भारत में “फर्स्ट इमिग्रेशन सेंटर” नाम की एक कंपनी शुरू की थी, जिसका इस्तेमाल हेडली भारत में कई जगहों पर जासूसी करने के लिए करता था। यह कंपनी 26/11 हमले से पहले हेडली के भारत आने-जाने का जरिया बन गई थी।

राणा ने कबूल किया कि वह नवंबर 2008 में भारत आया था और 20 और 21 तारीख को मुंबई के पवई इलाके में एक होटल में रुका था। इसके बाद वह हमले से ठीक पहले दुबई के रास्ते बीजिंग गया था।

मुंबई क्राइम ब्रांच ने 405 पन्नों की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कहा है कि तहव्वुर राणा ने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस जैसी अहम जगहों की टोह लेने में हेडली की मदद की थी। इस चार्जशीट में 14 गवाहों ने राणा की भूमिका की पुष्टि की है।

—पाकिस्तानी सेना और आईएसआई का सीधा संबंध

राणा ने यह भी कबूल किया कि वह पाकिस्तानी सेना के पूर्व मेजर अब्दुल रहमान पाशा, लश्कर-ए-तैयबा के सीनियर कमांडर साजिद मीर और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के अधिकारी मेजर इकबाल को व्यक्तिगत रूप से जानता है। ये सभी 26/11 हमले की योजना बनाने में शामिल थे।

इस हमले के मुख्य रणनीतिकार साजिद मीर को पहले पाकिस्तान ने “मृत” घोषित कर दिया था, लेकिन बाद में उसे “जिंदा” दिखाया गया और फिर गिरफ्तार कर लिया गया। पाशा के बारे में यह भी कहा जाता है कि वह डेनमार्क के एक अखबार पर हमले की साजिश में भी शामिल था।

राणा ने यह भी बताया कि खाड़ी युद्ध के दौरान पाक सेना ने उसे एक गुप्त मिशन पर सऊदी अरब भेजा था, जिससे पता चलता है कि वह लंबे समय तक पाकिस्तानी सैन्य खुफिया तंत्र का हिस्सा था।

—मुंबई आतंकी हमला: एक भयानक अध्याय

26 नवंबर 2008 को लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकी समुद्र के रास्ते मुंबई में घुसे और एक साथ 12 जगहों पर हमला किया। ये हमले छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट, नरीमन हाउस, कैफे लियोपोल्ड जैसी प्रमुख जगहों पर हुए।

मुंबई में हुए इस आतंकी हमले में कुल 166 लोगों की जान गई और सैकड़ों लोग घायल हुए। आतंकियों ने गोलियां चलाईं, ग्रेनेड फेंके और बम धमाके किए। यह हमला तीन दिनों तक चला और पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया।

हमले के बाद राणा ने कथित तौर पर हेडली से कहा कि “यही भारतीयों को मिलना चाहिए था”, जिससे उसकी आतंकवाद समर्थक मानसिकता साफ हो जाती है।

—फर्जी दस्तावेज और भारत में घुसपैठ

पूछताछ के दौरान राणा ने यह भी माना कि उसने फर्जी दस्तावेजों के जरिए हेडली को भारत में घुसने में मदद की थी। इस बारे में पूछे जाने पर उसने आरोप लगाया कि इसमें भारतीय दूतावास की भी गलती थी। हालांकि, जांच एजेंसियों ने साफ कर दिया है कि उसने खुद हेडली को गलत दस्तावेज तैयार करने में मदद की थी।

—मौजूदा स्थिति और आगे की जांच

अप्रैल 2025 में अमेरिका से प्रत्यर्पण के बाद राणा को एनआईए की हिरासत में रखा गया है। उसके खिलाफ कुल 10 आपराधिक मामले चल रहे हैं। अब तक की पूछताछ और गवाहों के बयानों के आधार पर उसकी भूमिका पूरी तरह से स्पष्ट हो गई है।

मुंबई पुलिस, एनआईए और अन्य खुफिया एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच में पाक सेना, आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा के बीच गहरे संबंधों के और सबूत सामने आए हैं।

— निष्कर्ष :  राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा

तौह्वुर राणा के खुलासे से यह साफ हो गया है कि 26/11 का हमला महज आतंकी हमला नहीं था, बल्कि यह पाकिस्तानी सेना की साजिश थी और इसके पीछे खुफिया एजेंसियों का हाथ था।

भारत को अब न सिर्फ बंदूक लेकर आने वाले आतंकियों से बल्कि कारोबारी या नागरिक पहचान के वेश में आकर देश में आतंक फैलाने की साजिश रचने वाले एजेंटों से भी सावधान रहना होगा।

यह मामला सुरक्षा एजेंसियों, विदेश मंत्रालय और नागरिक प्रशासन सभी के लिए एक चेतावनी है कि देश विरोधी ताकतें साजिश रचने के लिए किस हद तक जा सकती हैं।

 

—(खबरों के लाइव अपडेट और विस्तृत विश्लेषण के लिए स्वतंत्र वाणी पर बने रहें।)

Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

“स्वतंत्र वाणी” – जहाँ सच की आवाज़ कभी दबती नहीं। स्वतंत्र वाणी एक स्वतंत्र ऑनलाइन समाचार और ब्लॉग मंच है, जिसका उद्देश्य है पाठकों तक सही, निष्पक्ष और ताज़ा जानकारी पहुँचाना। यहाँ राजनीति, शिक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य, मनोरंजन, खेल और लाइफ़स्टाइल से जुड़ी हर महत्वपूर्ण ख़बर और जानकारी आसान भाषा में प्रस्तुत की जाती है। हम मानते हैं कि सच्चाई कभी दबाई नहीं जा सकती, इसलिए हमारा हर लेख और ख़बर तथ्यों पर आधारित होती है, ताकि पाठकों तक भरोसेमंद और निष्पक्ष पत्रकारिता पहुँच सके।