सत्यपाल मलिक पर 2200 करोड़ रुपए के घोटाले में लगा भ्रष्टाचार का आरोप :

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सत्यपाल मलिक पर भ्रष्टाचार के आरोप : 2200 करोड़ रुपये के कीरू प्रोजेक्ट घोटाले में सीबीआई की चार्जशीट, भाजपा से बढ़ी दूरी और राजनीतिक उथल-पुथल है

देश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। इस बार मामला सत्यपाल मलिक से जुड़ा है, जो कभी भाजपा के करीबी माने जाते थे और अब भाजपा की नीतियों और नेतृत्व के कटु आलोचक बन गए हैं। 2200 करोड़ रुपये के कीरू हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई ने सत्यपाल मलिक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह खबर न सिर्फ कानून-व्यवस्था से जुड़ी है, बल्कि इससे भाजपा की विश्वसनीयता और सत्ता के इस्तेमाल पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

— सीबीआई की चार्जशीट में सत्यपाल मलिक का नाम

सीबीआई ने गुरुवार को सत्यपाल मलिक और पांच अन्य के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की। यह मामला जम्मू-कश्मीर में 2200 करोड़ रुपये के एक ठेके में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है। यह ठेका कीरू हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के तहत दिया गया था, जिसका संचालन चेनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (सीवीपीपीपीएल) करता है।

23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक ने पहले ही इस परियोजना में भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। उन्होंने दावा किया था कि परियोजना से जुड़ी फाइलों को मंजूरी देने के लिए उन्हें 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी। मामला तब और संवेदनशील हो गया जब मलिक ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के अधीन एजेंसियां उन्हें निशाना बना रही हैं।

— अस्पताल में भर्ती सत्यपाल मलिक ने कहा- जवाब देने की स्थिति में नहीं

चार्जशीट दाखिल होने के तुरंत बाद सत्यपाल मलिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि वह अस्पताल में भर्ती हैं और किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास कई शुभचिंतकों के फोन आ रहे हैं, लेकिन वह जवाब नहीं दे पा रहे हैं।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीबीआई की कार्रवाई के कारण सत्यपाल मलिक पर राजनीतिक दबाव और कानूनी संकट दोनों गहरा गए हैं।

— भाजपा से नाराज सत्यपाल मलिक ने खुलकर की आलोचना

एक समय था जब सत्यपाल मलिक को भाजपा का वफादार माना जाता था। वह पार्टी के टिकट पर सांसद और राज्यपाल रह चुके हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में उन्होंने भाजपा की नीतियों की खुलकर आलोचना की है।

कृषि कानूनों को लेकर किसानों के आंदोलन के दौरान सत्यपाल मलिक ने भाजपा की नीतियों को किसान विरोधी बताया था। उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा और कहा कि सरकार किसानों की बात नहीं सुन रही है। इन बयानों से भाजपा से उनकी दूरी साफ झलक रही थी।

अब जब सीबीआई ने उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए चार्जशीट दाखिल की है तो सवाल उठता है कि क्या यह कानून की निष्पक्ष कार्रवाई है या भाजपा की आलोचना का नतीजा?

300 करोड़ की रिश्वत का बड़ा दावा

सत्यपाल मलिक ने दावा किया था कि उन्हें कीरू परियोजना से जुड़ी फाइलों को मंजूरी देने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी। लेकिन उन्होंने इस पेशकश को ठुकरा दिया और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को इसकी जानकारी दी।

कुछ भाजपा नेताओं ने मलिक के बयान को ‘राजनीतिक ड्रामा’ बताया, लेकिन उनके आरोप ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल खड़े कर दिए।

“मैंने शिकायत की और मेरे घर पर छापा पड़ा”: मलिक का दर्द

सत्यपाल मलिक ने साफ आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों के खिलाफ उन्होंने शिकायत की थी, उनकी जांच करने के बजाय सीबीआई ने उनके ही घर पर छापा मारा। उन्होंने एक्स पर लिखा:

“उन्हें मेरे घर से 4-5 कुर्ते-पजामे के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। तानाशाह सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग करके मुझे डराने की कोशिश कर रहा है। मैं किसान का बेटा हूं, न डरूंगा, न झुकूंगा।”

यह बयान भाजपा सरकार की कार्यशैली पर सीधा हमला है और एक पूर्व राज्यपाल की ऐसी प्रतिक्रिया देश में जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

चार्जशीट में और किन लोगों के नाम हैं?

सत्यपाल मलिक के अलावा सीबीआई द्वारा दाखिल आरोपपत्र में निम्नलिखित अधिकारियों और संस्थाओं के नाम हैं:

नवीन कुमार चौधरी (सीवीपीपीपीएल के पूर्व अध्यक्ष)

एमएस बाबू, एमके मित्तल, अरुण कुमार मिश्रा (परियोजना से जुड़े अधिकारी)

पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड (ठेका पाने वाली निर्माण कंपनी)

इन सभी पर परियोजना में अनुचित लाभ लेने, नियमों की अनदेखी करने और रिश्वतखोरी में लिप्त होने का आरोप है।

— विपक्ष ने भाजपा पर किया हमला

इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने भी भाजपा पर हमला करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कहा है कि भाजपा अब सरकार के संरक्षण में जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, ”एक समय सत्यपाल मलिक भाजपा के साथ थे, लेकिन जब उन्होंने सच बोलना शुरू किया तो अब उन्हें फंसाया जा रहा है।”

— क्या यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है ?

बहस का सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि क्या यह जांच निष्पक्ष है या भाजपा के खिलाफ बोलने का नतीजा है?

सत्यपाल मलिक के भाजपा से मतभेद जगजाहिर हैं। उन्होंने न सिर्फ किसान आंदोलन का समर्थन किया, बल्कि केंद्र सरकार के कई फैसलों की खुलकर आलोचना भी की। ऐसे में जब सीबीआई उनके खिलाफ कार्रवाई करती है, तो सवाल उठता है कि क्या सरकार आलोचकों को चुप कराने की कोशिश कर रही है?

निष्कर्ष: सत्य की खोज या सत्ता का दमन ?

सत्यपाल मलिक और भाजपा के बीच अब जो संघर्ष दिखाई दे रहा है, वह सिर्फ एक व्यक्ति और पार्टी के बीच की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र, निष्पक्षता और पारदर्शिता की परीक्षा है।

अगर सत्यपाल मलिक ने वाकई भ्रष्टाचार में हिस्सा लिया है, तो उन्हें कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए। लेकिन अगर यह कार्रवाई सिर्फ इसलिए की गई है क्योंकि उन्होंने भाजपा की आलोचना की है, तो यह देश के लोकतंत्र के लिए खतरे का संकेत है।

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Author: Swatantra Vani

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