संसद में Constitution Day समारोह

संसद में Constitution Day समारोह

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

संसद में Constitution Day समारोह: राष्ट्रपति के नेतृत्व में पढ़ी गई प्रस्तावना, देशभर में मनाया जा रहा संवैधानिक मूल्यों का उत्सव

संसद के केंद्रीय कक्ष में बुधवार को Constitution Day, 2025 का भव्य और गरिमामय समारोह आयोजित किया गया। यह आयोजन न केवल भारत के लोकतांत्रिक ढांचे का उत्सव था, बल्कि संवैधानिक आदर्शों के प्रति राष्ट्र की निष्ठा को दोहराने का भी महत्वपूर्ण अवसर बना। इस वर्ष का Constitution Day इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि अध्यक्षता स्वयं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की और देश ने उनके नेतृत्व में संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया।

संसद में Constitution Day समारोह

उच्च dignitaries की मौजूदगी ने बढ़ाई शान

सेंट्रल हॉल में आयोजित इस समारोह में भारतीय लोकतंत्र के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति रही। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और कई केंद्रीय मंत्री कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी उपस्थित रहे। इस संयुक्त उपस्थिति ने लोकतांत्रिक एकता का संदेश दिया और Constitution Day के महत्व को और मजबूत किया।

लोकसभा अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति के संबोधन से हुई शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि संविधान भारत की आत्मा है और हमारे लोकतंत्र की नींव इसी दस्तावेज़ पर टिकी है।

इसके बाद उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने वक्तव्य में संविधान के माध्यम से नागरिकों को प्राप्त अधिकारों और कर्तव्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संविधान केवल शासन की रूपरेखा नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता का प्रतीक भी है।

राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: “सामाजिक न्याय संविधान का मूल तत्व”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में संविधान के महत्व पर विस्तृत रूप से बात की और कहा कि भारत के संविधान की मूल भावना सामाजिक न्याय है। उन्होंने कहा:

“हमारा संविधान कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान का मार्ग दिखाता है। यह केवल कानूनों का संग्रह नहीं, बल्कि समरसता, समानता और मानव गरिमा का मार्गदर्शक है।”

राष्ट्रपति के संबोधन के बाद सेंट्रल हॉल में उपस्थित सभी गणमान्य लोगों ने उनके नेतृत्व में भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया। यह क्षण अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक था, जिसने Constitution Day समारोह को विशेष स्वरूप दिया।

संसद में Constitution Day समारोह

डिजिटल स्वरूप में कई योजनाओं का लोकार्पण

Constitution Day समारोह के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रकाशन और डिजिटल योजनाओं का अनावरण किया गया। इनमें शामिल हैं:

विधायी विभाग द्वारा तैयार नौ भाषाओं — मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया — में संविधान का लोकार्पण संस्कृति मंत्रालय की स्मारक पुस्तिका “भारत के संविधान से कला और कैलीग्राफी” (हिंदी संस्करण) का विमोचन ये सभी पहलें संविधान को आम जनता तक और अधिक सरलता व विविधता के साथ पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।

देशभर में Constitution Day का जन-उत्सव

Constitution Day 2025 केवल संसद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के हर राज्य, केंद्र शासित प्रदेश और स्थानीय निकायों ने भी इसे व्यापक स्तर पर मनाया।

केंद्रीय मंत्रालयों, सरकारी विभागों और शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। आम नागरिकों की भागीदारी को ध्यान में रखते हुए कई डिजिटल पहलें भी शुरू की गईं:

  • MyGov और संविधान75 पोर्टल पर ऑनलाइन प्रस्तावना वाचन
  • सोशल मीडिया पर प्रमाणपत्र सृजन और साझाकरण
  • ‘हमारा संविधान — हमारा स्वाभिमान’ विषय पर राष्ट्रीय क्विज, ब्लॉग और निबंध प्रतियोगिताएं
  • स्कूलों, कॉलेजों और पंचायत स्तर पर सेमिनार, वाद-विवाद, लघु फिल्में, प्रदर्शनी और चित्रकला प्रतियोगिताएं

इन कार्यक्रमों ने साबित किया कि Constitution Day आज एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुका है, जहां हर भारतीय संवैधानिक मूल्यों को आत्मसात करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Constitution Day: सिर्फ उत्सव नहीं, एक संकल्प भी

हर साल 26 नवंबर को मनाया जाने वाला Constitution Day हमें याद दिलाता है कि यह महान दस्तावेज हमारे लोकतंत्र की आधारशिला है। 2025 का समारोह इस बात का प्रमाण है कि भारत अपने लोकतांत्रिक मूल्यों, अधिकारों, कर्तव्यों और न्याय की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने को लेकर प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर राष्ट्र ने एक बार फिर दोहराया कि संविधान केवल एक पुस्तिका नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, पहचान और मार्गदर्शक है।

खबरों के लाइव अपडेट और विस्तृत विश्लेषण के लिए स्वतंत्र वाणी पर बने रहें।

kamalkant
Author: kamalkant

कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।