संकट में हावर्ड यूनिवर्सिटी के विदेशी छात्र: ट्रंप प्रशासन के फैसले से 800 भारतीय छात्रों का भविष्य खतरे में

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संकट में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के विदेशी छात्र: ट्रंप प्रशासन की 6 शर्तें, 72 घंटे का समय | 800 भारतीय छात्रों का भविष्य खतरे में – 

नई दिल्ली: अमेरिका की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी इन दिनों बड़े संकट से जूझ रही है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लिए गए एक अप्रत्याशित फैसले में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (SEVP) सर्टिफिकेशन को रद्द कर दिया गया है, जिसके चलते यूनिवर्सिटी अब F-1 और J-1 वीजा पर विदेशी छात्रों को दाखिला नहीं दे सकेगी। इस फैसले से करीब 6,800 अंतरराष्ट्रीय छात्रों, जिनमें करीब 800 छात्र भारतीय हैं, का भविष्य अधर में लटक गया है। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने छह सख्त शर्तें पूरी करके हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को अपना सर्टिफिकेशन बहाल करने के लिए 72 घंटे का समय दिया है।

खतरे में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के विदेशी छात्र

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में विदेशी छात्रों की संख्या कुल छात्रों का करीब 25% है। ऐसे में यह फैसला यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक और सामाजिक ढांचे को गहराई से प्रभावित कर सकता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अब डर सता रहा है कि उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़कर या तो अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है या फिर किसी दूसरी यूनिवर्सिटी में जाना पड़ सकता है।

भारतीय छात्रों को बड़ा झटका

इस पूरी घटना में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले करीब 800 भारतीय छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इन छात्रों ने अपने करियर और भविष्य को ध्यान में रखते हुए अमेरिका आने के लिए लाखों रुपये खर्च किए थे। अब अचानक आए इस फैसले से उनकी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने का सपना साकार करने वाले इन छात्रों के सामने अनिश्चितता की स्थिति है।

-हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को मिली 6 शर्तों की सूची

ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को 72 घंटे के भीतर नीचे दी गई 6 सख्त शर्तों को पूरा करने का आखिरी मौका दिया है। अगर ऐसा होता है तो SEVP सर्टिफिकेशन बहाल हो सकता है और विदेशी छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा:

1. गैर-अमेरिकी छात्रों द्वारा अवैध गतिविधियों से संबंधित सभी रिकॉर्ड: पिछले 5 सालों में किसी भी अवैध गतिविधि (चाहे वह कैंपस के अंदर हो या बाहर) से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, ऑडियो या वीडियो फुटेज हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को जमा करानी होगी। 2. हिंसक या खतरनाक गतिविधियों का रिकॉर्ड: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को यह भी बताना होगा कि पिछले 5 सालों में किसी विदेशी छात्र ने किसी तरह की हिंसक गतिविधि में हिस्सा लिया है या नहीं। 3. धमकियों से जुड़ी जानकारी: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को किसी छात्र द्वारा दूसरे छात्रों या कर्मचारियों को दी गई धमकियों के सबूत भी प्रशासन के सामने पेश करने होंगे। 4. अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े दस्तावेज: अगर किसी विदेशी छात्र ने दूसरे छात्रों या कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन किया है, तो उससे जुड़ी जानकारी और फुटेज देना अनिवार्य होगा। 5. अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी: पिछले 5 सालों में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विदेशी छात्रों के खिलाफ उठाए गए सभी अनुशासनात्मक कदमों का रिकॉर्ड देना होगा। 6. प्रदर्शन गतिविधियों की वीडियो फुटेज: पिछले 5 सालों में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के किसी भी कैंपस में हुए प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले विदेशी छात्रों की ऑडियो/वीडियो फुटेज भी अनिवार्य है। — हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के खिलाफ यह कार्रवाई क्यों की गई? पिछले कुछ महीनों से ट्रंप प्रशासन और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बीच “कैंपस एंटीसेमिटिज्म” को लेकर तनाव चल रहा है। प्रशासन का आरोप है कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने कैंपस में छात्रों के बढ़ते यहूदी विरोधी प्रदर्शनों और कट्टरपंथी गतिविधियों को गंभीरता से नहीं लिया। इसी के चलते यह सख्त कदम उठाया गया है।

–विदेशी छात्रों के पास दो ही विकल्प

अब जबकि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का SEVP सर्टिफिकेशन रद्द कर दिया गया है, विदेशी छात्रों के पास दो ही विकल्प बचे हैं:

SEVP से मान्यता प्राप्त किसी दूसरे विश्वविद्यालय में ट्रांसफर ले लें।

या फिर अमेरिका छोड़कर अपने देश लौट जाएं क्योंकि उनका वीजा अब वैध नहीं रहेगा।

इस समय हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में कई छात्र ऐसे हैं जो इसी सेमेस्टर में अपनी डिग्री पूरी कर रहे हैं। उन्हें थोड़ी राहत मिली है क्योंकि उनकी पढ़ाई खत्म होने वाली है।

— हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के छात्रों में बेचैनी

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के हजारों छात्र इस फैसले के बाद चिंतित और घबरा गए हैं। कई छात्र सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा और दुख जाहिर कर रहे हैं। एक भारतीय छात्र ने ट्वीट किया:

“हमने यहां तक पहुंचने के लिए अपनी पूरी जिंदगी की कमाई खर्च कर दी है और अब अचानक हमें बताया जा रहा है कि हमें या तो अमेरिका छोड़ना होगा या किसी नए कॉलेज में दाखिला लेना होगा। यह सरासर अन्याय है।”

-शिक्षा विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय को छात्रों के हित में प्रशासन द्वारा मांगी गई सभी जानकारियां जल्द से जल्द जमा कर देनी चाहिए। वहीं, कई विशेषज्ञ इस फैसले को राजनीति से प्रेरित मानते हैं। उनका कहना है कि छात्रों को प्रशासनिक फैसलों की बलि नहीं चढ़ानी चाहिए।

एक जाने-माने शिक्षा नीति विशेषज्ञ का कहना है, “हार्वर्ड विश्वविद्यालय न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की बौद्धिक विरासत है। इसे निशाना बनाना विश्व शिक्षा समुदाय के लिए खतरे की घंटी है।”

-हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का अगला कदम क्या होगा ?

अब सबकी निगाहें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर टिकी हैं कि वह अगले 72 घंटों में क्या कदम उठाती है। क्या वह मांगी गई सभी जानकारियां समय पर मुहैया करा पाएगी? क्या वह अपनी प्रतिष्ठा बचा पाएगी? या फिर हजारों विदेशी छात्रों को निराश होकर अमेरिका छोड़ना पड़ेगा?

–निष्कर्ष: विश्व विश्वविद्यालय पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा, छात्रों का भविष्य और वैश्विक शिक्षा में अमेरिका की साख – सब इस विवाद में दांव पर लगे हैं। आने वाले 72 घंटे बेहद निर्णायक होंगे। अगर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रशासन अपनी सख्ती छोड़कर ट्रंप प्रशासन की शर्तों को पारदर्शिता के साथ पूरा करे तो इस संकट से बचा जा सकता है।

Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

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