राजस्थान में भारतीय वायुसेना का जगुआर लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त

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राजस्थान में भारतीय वायुसेना का जगुआर लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त: दो पायलट शहीद, एक साल में तीसरी दुर्घटना ने उठाए सुरक्षा पर सवाल, पीएम मोदी ने जताया शोक

9 जुलाई, 2025 को राजस्थान के चुरू जिले में भारतीय वायुसेना (IAF) का एक जगुआर प्रशिक्षण लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें दो पायलटों की मौत हो गई। यह दुर्घटना दोपहर करीब 1:25 बजे भनोदा गाँव के पास एक खेत में हुई, जब विमान एक नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था। इस साल जगुआर विमान की यह तीसरी दुर्घटना है, जिसने एक बार फिर इस पुराने लड़ाकू विमान की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजस्थान में भारतीय वायुसेना का जगुआर लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त

लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त : दुर्घटना का विवरण

सूत्रों के अनुसार, विमान ने राजस्थान के सूरतगढ़ एयरबेस से उड़ान भरी थी और यह एक नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था। उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी के कारण विमान नियंत्रण खो बैठा और अंततः चुरू जिले के भनोदा गाँव के पास एक खेत में गिर गया। विमान में स्क्वाड्रन लीडर लोकेंद्र और फ्लाइट लेफ्टिनेंट ऋषि सवार थे, दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

स्थानीय लोगों ने बताया कि विमान में आग लग गई और घटनास्थल पर धुआँ उठ रहा था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “पायलट ने गाँव को नुकसान से बचाने की पूरी कोशिश की। मैं गवाही दे सकता हूँ कि उसने विमान को गाँव की तरफ़ से मोड़कर खेत में ले गया।” घटनास्थल पर वायुसेना की एक डायरी भी मिली, जिसे स्थानीय एसएचओ को सौंप दिया गया।

लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त : कोई नागरिक हताहत नहीं

भारतीय वायुसेना ने अपने बयान में कहा कि दुर्घटना में किसी भी नागरिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुँचा। वायुसेना ने ट्विटर पर कहा, “भारतीय वायुसेना दो बहादुर पायलटों के निधन से बेहद दुखी है। हम इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। दुर्घटना की जाँच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का गठन किया गया है।”

लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, “चूरू में वायुसेना के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर बेहद दुखद है। इस दुर्घटना में देश ने अपने दो वीर सपूतों को खो दिया है। मैं शहीद पायलटों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूँ।”

राजस्थान सरकार की प्रतिक्रिया

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी दुर्घटना पर शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा, “चूरू जिले के रतनगढ़ क्षेत्र में भारतीय वायु सेना के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की दुखद खबर मिली है। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य के निर्देश दे दिए गए हैं।”

2025 में जगुआर विमान की तीसरी दुर्घटना

इस साल जगुआर विमान की यह तीसरी दुर्घटना है। इससे पहले:

7 मार्च 2025: हरियाणा के अंबाला एयरबेस से उड़ान भरने के बाद सिस्टम फेल होने के कारण जगुआर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पायलट ने विमान को नागरिक क्षेत्रों से दूर उतारा और सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहा।

2 अप्रैल 2025: गुजरात के जामनगर में एक रात्रि मिशन के दौरान एक जगुआर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार दो पायलट समय रहते बाहर निकल गए, लेकिन फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव की मृत्यु हो गई। उनका परिवार आज भी उस शहादत को गर्व और दर्द के साथ याद कर रहा है।

सिद्धार्थ यादव की शहादत

फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव की कहानी देश को भावुक कर देती है। वह एक रात्रि मिशन पर थे जब विमान तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उन्होंने अपने साथी की जान तो बचा ली, लेकिन खुद समय पर बाहर नहीं निकल पाए। वह हरियाणा के रेवाड़ी जिले के रहने वाले थे और 23 मार्च को उनकी सगाई हुई थी। उनके पिता सुशील यादव ने एनडीटीवी से कहा, “हमें गर्व है कि मेरे बेटे ने दूसरे की जान बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। लेकिन दुख की बात यह है कि वह मेरा इकलौता बेटा था।” जगुआर विमान: गौरवशाली लेकिन पुराना योद्धा SEPECAT जगुआर एक ब्रिटिश-फ्रांसीसी परियोजना थी, जिसे 1968 में डिज़ाइन किया गया था। भारत ने इसे 1979 में ‘शमशेर’ नाम से वायुसेना में शामिल किया था। इस विमान को कम ऊँचाई पर गहराई तक घुसकर लक्ष्य पर हमला करने में माहिर माना जाता है।

1999 के कारगिल युद्ध में, इसने टोही अभियानों और ऊँचे लक्ष्यों को निशाना बनाने में योगदान दिया था।

2019 के बालाकोट हवाई हमले में भी, जगुआर विमान ने पाकिस्तानी F-16 विमानों को गुमराह करने के लिए एक प्रलोभन की भूमिका निभाई थी।

तकनीकी समस्याएँ और पुराने इंजन

जगुआर में लगे रोल्स-रॉयस/टर्बोमेका एडोर Mk 804 और Mk 811 इंजन अब भारतीय परिस्थितियों में विश्वसनीय नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये इंजन अधिक गर्मी और ऊँचाई पर आवश्यक थ्रस्ट प्रदान करने में असमर्थ हैं, जिससे टेक-ऑफ और निम्न-स्तरीय उड़ानों में जोखिम बढ़ जाता है।

इसके अलावा, इन इंजनों के लिए स्पेयर पार्ट्स भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे मरम्मत और रखरखाव में बाधा आती है।

वायुसेना की घटती ताकत

भारतीय वायु सेना के पास वर्तमान में केवल 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42.5 है। चीफ एयर मार्शल एपी सिंह ने फरवरी में कहा था कि युद्ध के लिए तैयार रहने के लिए वायु सेना को हर साल 40 लड़ाकू विमानों की आवश्यकता होती है। एचएएल तेजस MK2, राफेल और एमआरएफए की खरीद में देरी के कारण जगुआर जैसे पुराने विमानों को सेवा में बनाए रखना अनिवार्य हो गया है।

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं

रॉयल एयर फ़ोर्स के पूर्व प्रशिक्षक टिम डेविस ने कहा था, “इंजन और एवियोनिक्स को अपग्रेड करने के बाद भी, एयरफ़्रेम की उम्र एक निश्चित सीमा के बाद कम हो जाती है। यह बिलकुल साफ़ है—हर पायलट की जान कीमती है, और विमान जितना पुराना होगा, जोखिम उतना ही ज़्यादा होगा।”

निष्कर्ष :

राजस्थान में हुए ताज़ा हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जगुआर जैसे पुराने विमान अब भी उड़ान भरने लायक हैं? भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जो अभी भी इनका इस्तेमाल कर रहा है, जबकि बाकी देशों ने इन्हें संग्रहालयों में रख दिया है। ऐसे में यह ज़रूरी हो गया है कि भारत जल्द से जल्द नए विमान शामिल करके अपनी वायुसेना की ताकत को और मज़बूत करे।

देश ने एक बार फिर अपने दो वीर सपूतों को खो दिया है। उन्हें शत-शत नमन। जय हिंद

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Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

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