एसआईआर प्रक्रिया में बड़ा खुलासा: Varanasi से छह लाख मतदाता होंगे बाहर, 14 लाख की मैपिंग पूरी
Varanasi News – Varanasi में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है और इस बार निर्वाचन विभाग ने रिकॉर्ड स्तर पर सफाई अभियान चलाया है। जिले में कुल 31 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से करीब 25 लाख लोगों ने एसआईआर फॉर्म जमा किया है, जबकि 14 लाख मतदाताओं की मैपिंग प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। अनुमान है कि करीब छह लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे, जिससे यह Varanasi का अब तक का सबसे बड़ा संशोधन माना जा रहा है।
शहरी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा कटौती, ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 14% कमी
सूत्रों के अनुसार, मतदाता सूची में सबसे बड़ी कटौती शहर क्षेत्र में होने की उम्मीद है। शहरी इलाकों में 25% तक नाम हटाए जा सकते हैं, जबकि ग्रामीण हिस्सों में यह संख्या करीब 14% रहेगी। इसका कारण बताया जा रहा है—
- बड़ी संख्या में लोगों का शहर छोड़ना
- दूसरे जिलों में स्थायी रूप से बस जाना
- मृत्यु की स्थिति में वर्षों से अपडेट न होना
- एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम अलग-अलग जगह दर्ज होना
एसआईआर सर्वे के दौरान अजगरा, पिंडरा, शिवपुर और सेवापुरी विधानसभा में 100% काम पूरा हो चुका है। वहीं कैंट और दक्षिणी विधानसभा में 97%, रोहनिया में 96% और उत्तरी में 94% कार्य समाप्त हो गया है। निर्वाचन विभाग 11 दिसंबर तक पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए लक्ष्यबद्ध है।
बीएलओ की कार्रवाई पर सवाल: पूरा परिवार मतदाता सूची से बाहर
Varanasi ग्रामीण क्षेत्र के बीकापुर बूथ संख्या 153 पर नियुक्त बीएलओ विमला देवी पर ग्रामीण दूधनाथ यादव ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके परिवार के सभी सदस्यों के नाम बिना पूछे और बिना पुष्टि किए मतदाता सूची से हटा दिए गए। दूधनाथ ने बीडीओ चिरईगांव को लिखित शिकायत देकर कहा कि—
“हमारे परिवार का नाम केवल एक ही जगह दर्ज था। इसके बावजूद पूरा परिवार सूची से हटा दिया गया। यह प्रशासनिक लापरवाही है।”
जब इस बारे में बीएलओ से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि परिवार के लोग कहीं और रहते हैं और उन्हें ढूंढना संभव नहीं था। बीडीओ ने मामले की जांच कराने की बात कही है। ग्रामीण क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
मतदाता सूची में तीन-तीन आईडी: राजातालाब का अजीब मामला
राजातालाब निवासी राजकुमार ने बताया कि 2003 की मतदाता सूची में उनके पिता का नाम खोजते हुए उन्हें अपना नाम तीन अलग-अलग जगह दर्ज मिला—
- विधानसभा 230 गंगापुर, भाग संख्या 111 – जक्खिनी
- भाग संख्या 147 – कचनार
- भाग संख्या 122 – तोफापुर
तीनों जगह नाम राजकुमार और पिता का नाम बाबूलाल ही दर्ज था। राजकुमार ने कहा कि यह त्रुटि वर्षों से सॉफ्टवेयर और मैनुअल अपडेट की विसंगतियों के कारण बनी हुई थी। बाद में उन्होंने कचनार गांव की सूची अपलोड कर मैच किया और तभी सही जगह के लिए नया फॉर्म भर पाए।
2003 की मतदाता सूची में बड़ी गड़बड़ी, मैपिंग असंभव
सिरिस्ती गांव में मतदाता सूची से जुड़ी एक और बड़ी समस्या सामने आई है। वर्ष 2003 की सूची में छितौना गांव के लोगों के नाम दर्ज हैं, जबकि वर्तमान सूची में दोनों गांव की एंट्री पूरी तरह अलग है। ऐसे में नई सूची को 2003 के डेटा से मिलाकर मैपिंग करना संभव नहीं है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य रमेश अज्ञात ने बताया कि 2003 की सही मतदाता सूची उपलब्ध कराने की मांग को लेकर डीएम, एसडीएम और निर्वाचन आयोग को पंजीकृत पत्र भेजा गया है। उनका कहना है कि गलत सूची के आधार पर एसआईआर प्रक्रिया पूरी करना उचित नहीं है।
Varanasi में मतदाता सूची की सफाई क्यों आवश्यक?
Varanasi जैसे तेजी से बदलते शहर में लगातार आवागमन, पलायन, किरायेदारों का आना-जाना और पुराने रिकॉर्ड का अपडेट न होना प्रमुख कारण हैं। इसलिए इस बार निर्वाचन विभाग ने व्यापक समीक्षा अभियान चलाया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि—
- 20 साल पुरानी सूची पर आधारित त्रुटियों को अब ठीक किया जा रहा है।
- दोहरी एंट्री और फर्जी नाम हटाने पर जोर है।
- वोटिंग टर्नआउट और चुनावी पारदर्शिता दोनों पर इसका सकारात्मक असर पड़ेगा।
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Author: Rajesh Srivastava
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