Varanasi में देश का पहला Hydrogen vessels आज काशी में होगा लॉन्च, सोनोवाल दिखाएंगे हरी झंडी
Varanasi एक बार फिर देश में हरित तकनीक की मिसाल बनने जा रहा है। गंगा की धारा पर अब ऐसा इतिहास लिखा जाएगा, जो आने वाले वर्षों में देश की जल परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देगा। देश का पहला हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलने वाला जलयान गुरुवार को काशी में जनता को समर्पित किया जाएगा। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल नमो घाट से इसे हरी झंडी दिखाएंगे, जिसके साथ ही गंगा में पर्यावरण–अनुकूल यात्रा का एक नया अध्याय शुरू होगा।
एक साल के परीक्षण के बाद जनता के लिए तैयार
इस अनोखे जलयान का निर्माण कोच्चि शिपयार्ड में किया गया है और बीते एक वर्ष में इसे कई चरणों के कठोर परीक्षणों से गुजारा गया। रविवार और सोमवार को रामनगर मल्टीमॉडल टर्मिनल और रविदास घाट के बीच इसका अंतिम ट्रायल पूरा हुआ। अब यह जलयान पूरी तरह से संचालन के लिए तैयार है।
वाटर टैक्सी के रूप में होगी शुरुआत
आईडब्ल्यूएआई (अंतरदेशीय भारतीय जलमार्ग प्राधिकरण) के अनुसार, शुरुआती चरण में इसे नमो घाट से रविदास घाट के बीच वाटर टैक्सी के रूप में चलाया जाएगा। आगे चलकर इसकी सेवा अस्सी घाट और कैथी स्थित मार्कंडेय धाम तक विस्तार करने की योजना है।
यात्रियों की सुविधा और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसका संचालन शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड करेगा। हाइड्रोजन ईंधन की आपूर्ति बेंगलुरु की एक विशेष कंपनी द्वारा की जाएगी, जबकि नमो घाट और अस्सी घाट पर स्थापित दो हाइड्रोजन पंपिंग स्टेशन ‘न्यू इंडिया हाइड्रोजन’ द्वारा संचालित किए जाएंगे।
हाई-टेक फीचर्स और पूरी तरह साउंडलेस इंजन
देश का यह पहला Hydrogen vessels नई तकनीक से लैस है। इसमें—
- 50 यात्रियों के बैठने की क्षमता
- हाइब्रिड इलेक्ट्रिक इंजन
- पूरी तरह साउंड-लेस संचालन
- शून्य उत्सर्जन (Zero Emission)
यह जलयान न केवल तकनीकी रूप से उन्नत है, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे गंगा की स्वच्छता और घाटों के आसपास की वायु गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक चलेगा संचालन
नियमित सेवा के तहत यह वाटर टैक्सी सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक यात्रियों को सेवाएं देगी। हालांकि किराया अब तक तय नहीं किया गया है, लेकिन उम्मीद है कि इसे आम लोगों की पहुंच में रखा जाएगा ताकि ज्यादा संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग इसका लाभ उठा सकें।
10 करोड़ रुपये की लागत से बना देश का पहला Hydrogen vessels
यह जलयान पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और कोच्चि शिपयार्ड में लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में हरित ऊर्जा आधारित वाटर ट्रांसपोर्ट को आगे बढ़ाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। काशी में इसकी सफलता के बाद देश के अन्य नदी तटीय क्षेत्रों में भी इसी मॉडल पर सेवाएं शुरू की जा सकती हैं।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार
Varanasi में प्रतिदिन हजारों देशी–विदेशी पर्यटक आते हैं। घाटों के बीच यात्रा का यह नया, स्वच्छ और आधुनिक साधन उनकी सुविधा को तो बढ़ाएगा ही, साथ ही पर्यटन से जुड़ी अर्थव्यवस्था को भी गति देगा। इसके चलते स्थानीय पर्यटन उद्योग में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है।
गंगा पर पर्यावरण–अनुकूल यात्रा की शुरुआत
हाइड्रोजन ईंधन को भविष्य का स्वच्छ ऊर्जा स्रोत माना जाता है। इसके उपयोग से:
- प्रदूषण शून्य होगा
- ईंधन की खपत में कमी होगी
- ध्वनि प्रदूषण खत्म होगा
- गंगा का पर्यावरण सुरक्षित रहेगा
सोनोवाल द्वारा आज लॉन्च किया जा रहा यह जलयान न केवल तकनीक का नया अध्याय है, बल्कि यह उन प्रयासों का भी हिस्सा है जिसके तहत सरकार पर्यावरण–अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है।
Varanasi में शुरू हो रही यह ऐतिहासिक पहल आने वाले समय में गंगा यात्रा के अनुभव को बदल देगी। यह सिर्फ एक जलयान नहीं, बल्कि भारत की स्वदेशी तकनीक और हरित ऊर्जा की दिशा में बढ़ते कदम का प्रतीक है। काशी के घाटों पर हाइड्रोजन से चलने वाली यह वाटर टैक्सी निश्चित रूप से Varanasi में महत्वपूर्ण स्थान रखेगी और देशभर में एक नई मिसाल पेश करेगी।
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Author: Rajesh Srivastava
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