राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के द्वारा लखनऊ मैं धरना प्रदर्शन

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कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तर प्रदेश का धरना, मुख्यमंत्री को सौंपा गया मांगों का ज्ञापन

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में राज्य कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने एक बार फिर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। परिषद ने 20 जनवरी 2026 को प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन के क्रम में मुख्यमंत्री को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से सौंपा। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि वे लंबे समय से संवाद के जरिए समाधान की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।

संयुक्त परिषद के पदाधिकारियों के अनुसार, संगठन ने वर्ष 2025 से लेकर जनवरी 2026 तक कई बार मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (कार्मिक) को पत्र लिखकर कर्मचारियों की समस्याओं पर वार्ता का अनुरोध किया, लेकिन शासन स्तर पर अपेक्षित संवाद नहीं हो सका। इसी कारण 4 सितंबर 2025 से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया गया, जिसके तीन चरण पूरे हो चुके हैं और अब आंदोलन चौथे चरण में प्रवेश कर चुका है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के द्वारा लखनऊ मैं धरना प्रदर्शन

इस बीच विधानसभा में प्रस्तावित सम्मेलनों को देखते हुए परिषद ने प्रशासन के साथ सहयोग करते हुए धरना-प्रदर्शन के कार्यक्रम में संशोधन किया। संगठन ने यह भी दोहराया कि वह एक अनुशासित और जिम्मेदार कर्मचारी संगठन है, जो हमेशा सौहार्दपूर्ण वातावरण में समाधान चाहता है।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

ज्ञापन में रिक्त पदों को शीघ्र भरने, समय से पदोन्नति, पुरानी पेंशन योजना लागू करने, कैशलेस इलाज को सरल बनाने, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, आशा बहुओं का न्यूनतम मानदेय 18,000 रुपये तय करने, समय से महंगाई भत्ता भुगतान, मृतक आश्रित भर्ती, तथा विभिन्न विभागों में सेवा नियमावली और संवर्ग संरचना में सुधार जैसी अहम मांगें शामिल हैं।

कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री पर भरोसा जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि उनकी न्यायोचित मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। परिषद ने यह भी चेतावनी दी कि यदि समाधान नहीं निकला तो अगले चरण में अध्यक्ष जे.एन. तिवारी के नेतृत्व में प्रदेशभर में मंडल और जनपद स्तर पर पदयात्रा की जाएगी।

संवाद से समाधान की अपील

संयुक्त परिषद का कहना है कि पिछले एक वर्ष से संवाद की कमी के कारण यह स्थिति बनी है। संगठन ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान कराया जाए, ताकि आंदोलन को आगे बढ़ाने की आवश्यकता न पड़े। कर्मचारियों ने दोहराया कि वे प्रदेश के विकास में पूरी निष्ठा से योगदान दे रहे हैं और आगे भी देते रहेंगे।

यह खबर राज्य कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर सरकार और प्रशासन के लिए एक अहम संकेत मानी जा रही है, जहां संवाद के जरिए समाधान निकालना समय की जरूरत बताया जा रहा है।

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Author: kamalkant

कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।