मीर यार बेलुच ने की बलूचिस्तान के आजादी की घोषणा, भारत से मांगा समर्थन:

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हम पाकिस्तानी नहीं हैं”: मीर यार बेलुच ने बलूचिस्तान की आज़ादी की घोषणा की, भारत से समर्थन मांगा

नई दिल्ली, 15 मई, 2025 — दक्षिण एशिया में एक नया भू-राजनीतिक भूचाल आया है, जब मीर यार बेलुच ने घोषणा की कि बलूचिस्तान कभी भी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं था। 11 अगस्त 1947 को बलूचिस्तान की आज़ादी की ऐतिहासिक घोषणा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने भारत और वैश्विक समुदाय से अपील की कि वे बलूच लोगों को “पाकिस्तान के लोग” न कहें।

मीर यार बेलुच ने बलूच राष्ट्र के समर्थन में भारत के साथ खड़े होने की घोषणा करते हुए कहा कि बलूच लोग भारत के साथ हैं, ख़ास तौर पर मौजूदा भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच। उनका यह बयान भारत द्वारा “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत आतंकी शिविरों पर किए गए हमलों के बाद आया है।

बलूचिस्तान का ऐतिहासिक संघर्ष:

मीर यार बेलूच की भूमिका

मीर यार बेलूच ने स्पष्ट किया कि बलूचिस्तान को 11 अगस्त 1947 को ब्रिटिश राज से आजादी मिली थी, लेकिन पाकिस्तान ने 1948 में सैन्य बल का इस्तेमाल करके इसे जबरन अपने कब्जे में ले लिया। उन्होंने कहा कि पिछले 75 सालों से बलूच लोग पाकिस्तानी सेना द्वारा हवाई हमलों, जबरन गायब किए जाने और नरसंहार के शिकार हो रहे हैं।

मीर यार बेलूच ने अपने बयान में कहा, “हम पाकिस्तानी नहीं हैं, हम बलूचिस्तानी हैं। पाकिस्तान के अपने लोग पंजाबी हैं, जिन्होंने कभी हवाई हमलों या नरसंहार का सामना नहीं किया। कृपया हमें ‘पाकिस्तान के लोग’ न कहें।”

इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बीच, भारत-पाकिस्तान तनाव की स्थिति ने बलूच नेताओं को भारत के करीब ला दिया है, खासकर तब जब वे पीड़ित और उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच बलूचिस्तान ने भारत का समर्थन किया

हाल ही में भारत-पाकिस्तान तनाव जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के कारण हुआ था, जिसमें 28 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में भारत ने 7 मई 2025 को “ऑपरेशन सिंदूर” चलाया, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) और पाकिस्तान में स्थित आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया गया। भारतीय सेना ने दावा किया कि इस ऑपरेशन में 100 से ज़्यादा आतंकवादी मारे गए।

इस बीच, मीर यार बेलुच ने ट्विटर पर कहा, “बलूचिस्तान और उसके लोग भारत के साथ खड़े हैं। नरेंद्र मोदी जी, आप अकेले नहीं हैं, आपके साथ 60 मिलियन बलूच देशभक्त हैं।”

मीर यार बेलुच के इस समर्थन से साफ़ पता चलता है कि बलूच लोग खुद को पाकिस्तान से अलग मानते हैं और भारत-पाकिस्तान तनाव की स्थिति में भारत के पक्ष में खड़े हैं।

बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन: मीर यार बेलुच की चिंता

मीर यार बेलुच ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन की भयावह स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियां बलूच नागरिकों का अपहरण करती हैं, झूठे आरोपों में उनकी हत्या करती हैं और पत्रकारों की आवाज दबाती हैं।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि 2024 में बलूचिस्तान में करीब 400 लोग लापता हुए और 150 से ज्यादा बलूच कार्यकर्ता मारे गए।

इतना कुछ भी होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मीडिया और संयुक्त राष्ट्र ने बलूच मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया। इस संदर्भ में मीर यार बेलूच की भारत से अपील और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

-भारत में बलूचिस्तान का दूतावास खोलने की मांग

मीर यार बेलूच ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बलूचिस्तान की आजादी को आधिकारिक तौर पर मान्यता देने और नई दिल्ली में बलूचिस्तान का दूतावास खोलने की अपील की है। भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच यह मांग रणनीतिक दृष्टि से भी भारत के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

उन्होंने कहा, “हम एक स्वतंत्र राष्ट्र हैं। भारत को बलूचिस्तान के संघर्ष और मानवाधिकारों की लड़ाई को मान्यता देनी चाहिए।” यह मांग न केवल राजनीतिक रूप से बल्कि नैतिक रूप से भी भारत को मजबूत करती है, जिसने हमेशा आतंकवाद और मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाई है।

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और बलूच आंदोलन

मीर यार बेलूच के नेतृत्व में बलूच आंदोलन ने नई गति पकड़ी है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने हाल ही में “ऑपरेशन हीरोफ 2.0” के तहत पाकिस्तानी सेना के खिलाफ कई हमले किए हैं। ये गतिविधियां भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच भारत के लिए एक रणनीतिक अवसर बन सकती हैं।

बीएलए ने पाकिस्तान को “आतंकवाद प्रायोजित देश” बताया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को वैश्विक मंचों से अलग-थलग करने की मांग की है।

मीर यार बेलूच ने बलूचिस्तान को लोकतांत्रिक गणराज्य बताते हुए भारत से गहन सहयोग की मांग की है।

-निष्कर्ष: भारत के लिए बलूचिस्तान क्यों महत्वपूर्ण है?

मीर यार बेलूच द्वारा बलूचिस्तान की आजादी की घोषणा और भारत से समर्थन मांगना मौजूदा भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच भारत के लिए एक रणनीतिक अवसर हो सकता है। बलूचिस्तान की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधन और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) भू-राजनीतिक दृष्टि से इस क्षेत्र को भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाते हैं।

अगर भारत बलूचिस्तान का समर्थन करता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वहां मानवाधिकारों की स्थिति को उजागर करता है, तो वह पाकिस्तान पर नैतिक और कूटनीतिक दबाव बना सकता है।

मीर यार बेलुच की अपील सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि बलूच लोगों की आजादी की दशकों पुरानी मांग का प्रतीक है। अगर भारत इस मौके का फायदा उठाता है, तो यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और मानवाधिकारों की सुरक्षा की दिशा में कदम।

Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

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