अबू सैफुल्लाह : पाकिस्तान में मारा गया लश्कर-ए-तैयबा का खूंखार आतंकी, भारत में तीन बड़े आतंकी हमलों का था मास्टरमाइंड –
नई दिल्ली: लंबे समय से भारत के खिलाफ साजिश रच रहा लश्कर-ए-तैयबा का कुख्यात आतंकी अबू सैफुल्लाह आखिरकार मारा गया। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मतली इलाके में शनिवार को अज्ञात हमलावरों ने उसे गोली मार दी। अबू सैफुल्लाह, जिसका असली नाम रजाउल्लाह निजामनी था, लश्कर-ए-तैयबा का एक बड़ा आतंकी था, जो भारत में कई बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड रहा था।
— कौन था अबू सैफुल्लाह ?
अबू सैफुल्लाह उर्फ रजाउल्लाह निजामनी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर था। उसकी गिनती उन आतंकियों में होती थी, जिसने भारत में आतंक फैलाने की कई साजिशें रची और उन्हें अंजाम दिया। अबू सैफुल्लाह भारत में हुए तीन बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड था – 2001 में रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हमला, 2005 में बेंगलुरु में भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) पर हमला और 2006 में नागपुर में आरएसएस मुख्यालय पर हमला।
इन घटनाओं में दर्जनों निर्दोष लोगों की जान चली गई और कई घायल हो गए। अबू सैफुल्लाह की इन हरकतों ने उसे भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में डाल दिया था।
— पाकिस्तान में अबू सैफुल्लाह की हत्या कैसे हुई ?
सूत्रों के मुताबिक, अबू सैफुल्लाह शनिवार दोपहर को सिंध के मतली इलाके में स्थित अपने घर से निकला था। जैसे ही वह एक मुख्य चौराहे पर पहुंचा, अज्ञात हमलावरों ने उसे गोलियों से छलनी कर दिया। इस हमले में उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
इस हमले के बारे में पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह एक सुनियोजित हमला था। उल्लेखनीय है कि अबू सैफुल्लाह को पाकिस्तान सरकार की ओर से सुरक्षा मुहैया कराई गई थी, फिर भी उसे मार दिया गया। इससे यह सवाल उठता है कि क्या यह आतंकी संगठनों के बीच की प्रतिद्वंद्विता थी, या पाकिस्तान का खुद का आंतरिक “सफाई अभियान” था।
— लश्कर-ए-तैयबा और अबू सैफुल्लाह: एक खतरनाक गठबंधन :
लश्कर-ए-तैयबा पाकिस्तान का एक कट्टरपंथी इस्लामी आतंकी संगठन है, जिसे भारत और अमेरिका समेत कई देशों ने आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है। यह संगठन जम्मू-कश्मीर समेत भारत के कई हिस्सों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता रहा है। अबू सैफुल्लाह इस संगठन का प्रशिक्षित और अनुभवी आतंकी था।
अबू सैफुल्लाह ने न सिर्फ भारत में हमलों की योजना बनाई, बल्कि उसने दूसरे आतंकियों को ट्रेनिंग और रणनीति भी दी। वह लश्कर-ए-तैयबा के लिए भारत में “कोर ऑपरेटर” की भूमिका निभा रहा था।
— भारत में अबू सैफुल्लाह के आतंकी हमले :
1. रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हमला (2001)
उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) कैंप पर 2001 में हुआ आतंकी हमला बेहद घातक था। इसमें सात जवान शहीद हो गए थे। अबू सैफुल्लाह ने इस हमले की योजना बनाई थी और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों को निर्देश दिया था।
2. IISc बैंगलोर हमला (2005)
देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान IISc, बैंगलोर में 2005 में हुए आतंकवादी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इसमें एक प्रोफेसर की जान चली गई थी और कई घायल हो गए थे। इस हमले का मुख्य मास्टरमाइंड अबू सैफुल्लाह था, जिसने यहां लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेशन को अंजाम दिया था।
3. RSS मुख्यालय नागपुर हमला (2006)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर मुख्यालय को निशाना बनाकर किए गए हमले की योजना भी अबू सैफुल्लाह ने ही बनाई थी। हालांकि सुरक्षा बलों की सतर्कता के कारण यह हमला विफल हो गया, लेकिन इससे लश्कर-ए-तैयबा की गहरी साजिश का पता चला।
— पाकिस्तान सरकार और अबू सैफुल्लाह के बीच संबंध :
एक चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान सरकार ने अबू सैफुल्लाह को सुरक्षा मुहैया कराई हुई थी। वह सिंध के मतली में एक सुरक्षित स्थान पर रह रहा था और उसे पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों से सुरक्षा मिल रही थी। इससे पता चलता है कि किस तरह पाकिस्तान की सरकार और सेना लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों और उनके नेताओं को पनाह देती है।
अबू सैफुल्लाह का खुलेआम घूमना और सुरक्षित जीवन जीना यह साफ करता है कि पाकिस्तान आतंक के खिलाफ नहीं, बल्कि आतंक के साथ खड़ा है।
— क्या भारत की भूमिका हो सकती है ?
हालांकि अभी तक इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि अबू सैफुल्लाह को मारने में भारत की कोई भूमिका रही है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की खुफिया एजेंसियों की रणनीति का भी हिस्सा हो सकता है।
भारत की खुफिया एजेंसियों ने पहले भी विदेशों में अपने दुश्मनों को निशाना बनाया है। इसलिए आशंका है कि अबू सैफुल्लाह की मौत में कहीं न कहीं भारत की खुफिया एजेंसियों का हाथ हो सकता है। अगर ऐसा है तो यह लश्कर-ए-तैयबा के लिए कड़ा संदेश है।
— सुरक्षा विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया :
राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों ने अबू सैफुल्लाह की मौत को “बड़ी रणनीतिक जीत” बताया है। रॉ के पूर्व अधिकारियों का कहना है, “अबू सैफुल्लाह जैसे आतंकियों का खात्मा जरूरी है ताकि ऐसे तत्वों को सबक सिखाया जा सके।”
ब्रिगेडियर। (सेवानिवृत्त) आर.के. यादव ने कहा, “अबू सैफुल्लाह की मौत लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क के लिए बड़ा झटका है। इससे भारत में आतंकी हमलों की योजनाएँ कमज़ोर होंगी।”
निष्कर्ष :
अबू सैफुल्लाह की मौत भारत के लिए राहत भरी खबर है। यह घटना इस बात की पुष्टि करती है कि चाहे कितनी भी सुरक्षा व्यवस्था क्यों न हो आतंकवादी को अंततः अपने किए का परिणाम भुगतना ही पड़ता है।
लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठन और उनके खूंखार सदस्य भारत की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। लेकिन अबू सैफुल्लाह की मौत इस बात का संकेत है कि भारत अब अपने दुश्मनों के ठिकानों में घुसकर उन्हें खत्म करने की क्षमता रखता है।
Author: Swatantra Vani
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