भारत का अंतरिक्ष में नया इतिहास

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भारत का अंतरिक्ष में नया इतिहास: शुभांशु  शुक्ला पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री जो अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाएंगे

लेखक: नमन बरनवाल | | 9 जून 2025

नई दिल्ली – भारत ने एक बार फिर अंतरिक्ष तट के क्षेत्र में इतिहास रचने की तैयारी कर ली है। भारतीय वायु सेना के लड़ाकू पायलट और 39 वर्षीय शुभांशु शुक्ला अब अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की ओर प्रस्थान करने वाले हैं। यह मिशन भारत के अंतरिक्ष महारथी में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। यह पहली बार है जब कोई भारतीय अंतरिक्ष यात्री 40 वर्षों के बाद पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करेगा।

शुक्ला अमेरिका स्थित निजी कंपनी एक्सिओम स्पेस के चार-सदस्यीय मिशन का हिस्सा हैं, जो स्पेसएक्स के टैबलेट के मंगलवार को प्रेक्षेपण करेगा। उनके साथ मिशन कमांडर पेगी व्हिटसन (पूर्व नासा अंतरिक्ष यात्री), स्लावोस उज़ानांस्की-विस्नेव्स्की (पोलैंड) और टिबोर कापू (हंगरी) शामिल होंगे।

भारत का अंतरिक्ष में नया इतिहास

भारत की अंतरिक्ष यात्रा में ऐतिहासिक मोड़

शुभांशु शुक्ला की यह उड़ान भारत की उस कलंक का प्रतीक है जो अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। 1984 में राकेश शर्मा द्वारा सोवियत संघ के सोयुज अंतरिक्षयान से उड़ान की घोषणा के बाद, यह पहली बार था जब कोई भारतीय अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन अमेरिका पहुंचा।

शुक्ला ने एक इंटरव्यू में कहा,

 “मैं अकेला ही एकांत स्थान पर जा रहा हूं, लेकिन यह 1.4 अरब भारतीयों की यात्रा है। मैं चाहता हूं कि मेरी यह यात्रा हमारे देश के युवाओं के लिए अंतरिक्ष की प्रति जिज्ञासा जगाए।”

भारत के अंतरिक्ष विभाग ने इस मिशन में “देश की अंतरिक्ष योजना में एक विशाल अध्याय” बताया है। यह यात्रा केवल एक उड़ान नहीं है, बल्कि भारत की उस साझेदारी का प्रतीक है जो ग्लोबल स्पेस रेस में अपनी सोलोमन भागीदारी को शामिल करती है।

60 मिलियन डॉलर की लागत, लेकिन अमूल्य सबक

भारतीय मीडिया के अनुसार, इस मिशन के लिए भारत सरकार ने एक्सिओम स्पेस को 60 मिलियन डॉलर (करीब ₹500 करोड़) का भुगतान किया है। यह निवेश भविष्य की अंतरिक्ष योग्यता के लिए अनुभव और तकनीकी समझ को बढ़ाने में सहायक होगा।

इस मिशन के दौरान 14 दिनों तक शुभांशु शुक्ला और उनकी टीम के अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर लगभग 60 वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम दिया गया, जिनमें ये शामिल हैं:

सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (माइक्रोग्रैविटी) से संबंधित अध्ययन

पृथ्वी अवलोकन (पृथ्वी अवलोकन)

जीवन विज्ञान और जैविक अनुसंधान

सामग्री विज्ञान पर प्रयोग

भारत के अंतरिक्ष उपग्रह: चंद्रमा और गगनयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में घोषणा की थी कि भारत 2040 तक एक अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजा जाएगा। इसके अलावा इसरो (ISRO) भी अपना पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन गगनयान की योजना बना रहा है, जिसे हिंदी में “आकाशयान” कहा जाता है। यह मिशन 2027 तक लॉन्च हो चुका है और इसके लिए शुभांशु शुक्ला को संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है।

शुक्ला की ट्रेनिंग भी बेहद खास रही है। उन्होंने 2020 में रूस स्थित यूरी गागरिन कोस्मोनॉट प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त किया और फिर बेंगलुरु स्थित इसरो केंद्र में भी प्रशिक्षण लिया।

कम लागत में बड़ी उपलब्धियाँ: भारत की अंतरिक्ष सेना

पिछले एक दशक में भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ा है। इसरो ने बेहद कम बजट में कई बड़े मिशन पूरे किए हैं। अगस्त 2023 में भारत ने रूस, अमेरिका और चीन के बाद मून पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश एक नई उपलब्धि हासिल की थी।

भारत का सूर्य मिशन आदित्य-एल1, मंगल मिशन मंगलयान और चंद्रयान मिशन भी दुनिया भर में सारे गए हैं, क्योंकि अन्य देशों की तुलना में बहुत कम था।

वैश्विक अंतरिक्ष रेस में भारत की मजबूत उपस्थिति

जहां अमेरिका, रूस और चीन मानवयुक्त मिशनों में पहले से आगे चल रहे हैं, वहीं भारत अब तक इस क्षेत्र में कदम नहीं रख पाया है। लेकिन अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है। शुभांशु शुक्ला की इस फ्लाइट में भारत को उस क्लब में शामिल कर देवी शामिल हैं जिनमें केवल कुछ ही देश हैं।

एक्सिओम मिशन 4 केवल एक वैज्ञानिक अभियान नहीं है, बल्कि भारत की प्रौद्योगिकी और प्रतिष्ठित प्रतिष्ठा का भी प्रदर्शन करता है।

इस मिशन से भारत का भविष्य क्या बदलेगा?

इस मिशन से भारत को कई तरह के लाभ मिलने की उम्मीद है:

1. वैज्ञानिक ज्ञान – अंतरिक्ष में प्रयुक्त प्रयोगों से भारतीय पुरातत्व को सूक्ष्म, जैविक प्रतिक्रिया और नई खोज पर शोध करने का अवसर मिलेगा।

2. मानव मिशन की तैयारी – गगनयान जैसे मिशनों के लिए अनुभव प्राप्त करना आवश्यक होगा।

3. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग – स्पेसएक्स, एक्सिओम स्पेस और यूरोपीय शिक्षा के साथ तकनीकी सहयोग की खोज।

4. युवाओं में प्रेरणा – शुक्ला की यह यात्रा युवाओं को विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में उद्यमिता बनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।

भारत की अंतरिक्ष यात्रा कैसे देखें?

भारत ने सीमित प्रारूप में जो कुछ हासिल किया है, वह अतुलनीय है। अमेरिका और चीन की तुलना में भारत का अंतरिक्ष बजट बहुत कम है, लेकिन फिर भी नतीजे कमज़ोर हैं। यही कारण है कि भारत अब केवल सैटेलाइट लॉन्च तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि मानवयुक्त मिशनों की ओर बढ़ रहा है।

अंतिम शब्द: अंतरिक्ष में भारत की नई उड़ान

शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा सिर्फ एक अंतरिक्ष मिशन नहीं है, बल्कि यह भारत के आदर्श, तकनीकी दृढ़ता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की उड़ान है। इस मिशन में यह लिखा है कि भारत अब सिर्फ देखने वाला नहीं है, बल्कि निर्माता और नेता बनने की दिशा में विस्थापित हो गए हैं।

“यह सिर्फ अंतरिक्ष की यात्रा नहीं है, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा है।”- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

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Author: kamalkant

कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।