गुजरात पुल हादसा: वडोदरा में 40 साल पुराना गंभीरा पुल गिरा, अब तक 13 लोगों की मौत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने जताया शोक
वडोदरा, 9 जुलाई, 2025 — बुधवार सुबह गुजरात के वडोदरा ज़िले में एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जब गंभीरा पुल का एक हिस्सा अचानक टूटकर महिसागर नदी में समा गया। यह पुल पिछले 40 सालों से चालू था और दक्षिण गुजरात को सौराष्ट्र से जोड़ने वाला मुख्य संपर्क मार्ग था। इस हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत और 9 घायलों की पुष्टि हो चुकी है। राहत और बचाव कार्य देर शाम तक जारी रहा।

गंभीरा पुल : हादसे की भयावहता
यह हादसा बुधवार सुबह करीब 8 बजे हुआ जब गंभीरा पुल का 10 से 15 मीटर लंबा हिस्सा ढह गया। इस दौरान पुल से गुजर रहे ट्रक, वैन, बाइक और ऑटो समेत करीब 6 वाहन सीधे महिसागर नदी में गिर गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दुर्घटना के समय पुल पर सामान्य से ज़्यादा यातायात था। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ वाहन पुल के किनारे फँसे हुए थे, जिन्हें बाद में बचा लिया गया।
वडोदरा ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक रोशन आनंद ने बताया कि अब तक 9 लोगों को ज़िंदा निकाला जा चुका है, जिनमें से 5 का वडोदरा के एसएसजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। उन्होंने अंदेशा जताया कि अभी भी 2 से 3 वाहन महिसागर नदी में डूबे हो सकते हैं और मृतकों की तादाद में इज़ाफा होने की संभावना है।
गंभीरा पुल : हृदय विदारक दृश्य
दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर हृदय विदारक दृश्य देखे गए। एक वाहन के ऊपर खड़ी सोनलबेन पढियार नाम की महिला बार-बार चीख-चीखकर अपने पति और बच्चों को बचाने की गुहार लगा रही थी, लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें बचाया नहीं जा सका।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गंभीरा पुल की हालत कई सालों से जर्जर थी और इसकी मरम्मत सिर्फ़ औपचारिकता के लिए की गई थी। 2022 में वायरल हुए एक वीडियो में एक स्थानीय निवासी अधिकारी को पुल की ख़तरनाक स्थिति के बारे में चेतावनी देते हुए भी दिखाई दे रहा है।
पहले से चेतावनी दी गई थी, लेकिन उसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया
1986 में ₹3.43 करोड़ की लागत से बने गंभीरा पुल की तकनीकी रूप से आयु पूरी हो चुकी थी। भाजपा विधायक चैतन्यसिंह जाला ने विधानसभा में इस पुल की स्थिति पर चिंता जताई थी और एक नया पुल बनाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया था। सर्वेक्षण भी हुआ, लेकिन पुराने पुल को बंद नहीं किया गया और केवल पैचवर्क मरम्मत करके उसे चालू रखा गया।
कार्यकारी अभियंता एन.एम. नायकवाला ने स्वीकार किया कि पुल की तकनीकी आयु समाप्त हो चुकी थी, इसके बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही नहीं रोकी गई। यह दुर्घटना पुल के 23 स्पैन में से एक के ढहने के कारण हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और कहा, “गुजरात के वडोदरा जिले में गंभीरा पुल के ढहने से हुई जनहानि अत्यंत दुखद है। मेरी संवेदनाएँ शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से मृतकों के परिवारों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने अपनी विदेश यात्रा के दौरान भी इस दुर्घटना की जानकारी ली और राहत कार्यों की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस दर्दनाक हादसे को “अत्यंत दुखद और दिल दहला देने वाला” करार दिया। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों को ₹4 लाख और घायलों के लिए ₹50,000 की राहत राशि देने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से उन्हें फोन करके राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति के बारे में जानकारी ली और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने जांच के आदेश दिए
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सड़क एवं भवन विभाग को तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच के लिए मुख्य अभियंता (डिजाइन), दक्षिण गुजरात के मुख्य अभियंता और दो निजी विशेषज्ञ इंजीनियरों की एक टीम गठित की गई है। टीम को तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर तकनीकी कारणों की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
बचाव एवं राहत अभियान
दुर्घटना की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, दमकल विभाग, पुलिस और स्थानीय स्वयंसेवकों की टीमें मौके पर पहुँच गईं। बचाव अभियान में अब तक 9 लोगों को जीवित बचा लिया गया है। गिरने की कगार पर पहुँचे दो वाहनों को रस्सियों से खींचकर बाहर निकाला गया। दोपहिया वाहन पर सवार तीन लोग तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए।
विपक्ष का हमला
दुर्घटना के बाद, विपक्ष ने गुजरात सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने कहा, “गुजरात का यह पुल हादसा प्रशासन की घोर लापरवाही का नतीजा है। जब पुल की हालत खराब थी, तो इसे बंद क्यों नहीं किया गया?”
कई विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि इस दुर्घटना के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और जाँच को सार्वजनिक किया जाए।
यातायात बाधित, 50 किमी की अतिरिक्त दूरी
गंभीरा पुल दक्षिण गुजरात को सौराष्ट्र से जोड़ने वाला एकमात्र छोटा रास्ता था। अब इसके बंद होने से लोगों को 50 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। वर्तमान में, यातायात को वासद रोड की ओर मोड़ दिया गया, जिससे वहाँ जाम लग गया।
पुल की कुल लंबाई 900 मीटर और चौड़ाई 10.5 मीटर थी, और इसमें कुल 23 खंभे थे। इसका निर्माण उत्तर प्रदेश राज्य पुल निर्माण निगम द्वारा किया गया था।
निष्कर्ष :
गुजरात का यह पुल हादसा न केवल एक दर्दनाक त्रासदी है, बल्कि सरकार और प्रशासन की लापरवाही का भी ज्वलंत उदाहरण है। बार-बार चेतावनी के बावजूद गंभीरा पुल को बंद न करना, भारी वाहनों की आवाजाही की अनुमति न देना और सतही मरम्मत कार्य करना अब सवालों के घेरे में है।
अब जबकि 13 निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है, यह ज़रूरी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की घोषणाएँ केवल सांत्वना तक सीमित न रहें, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जाए और इसके लिए एक ठोस नीति बनाई जाए।
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Author: Swatantra Vani
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