पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि की बहाली को लेकर भारत को लिखे कई पत्र, भारत की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं
परिचय : सिंधु जल संधि के निलंबन से भारत-पाकिस्तान संबंधों में नई दरार
भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने भारत-पाक संबंध एक बार फिर गंभीर तनाव में हैं। इस बार वजह भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करना है, जो पहलगाम आतंकी हमले के बाद सामने आया। अप्रैल 2025 में हुए इस घातक हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी, जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इस महत्वपूर्ण जल संधि को ‘अस्थायी रूप से निलंबित’ कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान ने एक के बाद एक कई पत्र भेजकर भारत से सिंधु जल संधि को बहाल करने की मांग की, लेकिन अब तक भारत की ओर से कोई औपचारिक जवाब नहीं मिला है।

पाकिस्तान का दावा : सिंधु जल संधि को एकतरफा तरीके से निलंबित नहीं किया जा सकता
पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तजा ने अब तक भारत के जल शक्ति मंत्रालय को चार पत्र भेजे हैं, जिसमें उन्होंने भारत से सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। पाकिस्तान का दावा है कि यह संधि दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैध है और भारत इसे एकतरफा तरीके से निलंबित नहीं कर सकता।पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से तीन पत्र भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद भेजे गए थे। यह सैन्य कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी। भारत-पाकिस्तान संबंधों में यह स्थिति बेहद गंभीर मोड़ पर है, क्योंकि इस संधि को पहली बार आधिकारिक तौर पर निलंबित किया गया है।
भारत का जवाब : आतंकवाद खत्म होने तक कोई बातचीत नहीं होगी
भारत की ओर से इन पत्रों पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। जल संसाधन सचिव देबाश्री मुखर्जी ने 24 अप्रैल को पाकिस्तान को पत्र भेजकर जानकारी दी थी कि भारत अब सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों से जुड़े आंकड़े साझा नहीं करेगा। उन्होंने साफ कहा कि “कोई भी संधि आपसी विश्वास और ईमानदारी पर आधारित होती है, लेकिन पाकिस्तान लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है।” इसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 29 अप्रैल को साफ कर दिया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पूरी तरह और पूरे आत्मविश्वास के साथ खत्म नहीं कर देता, तब तक भारत पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं करेगा। सिंधु जल संधि: भारत-पाकिस्तान संबंधों में ऐतिहासिक कड़ी सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी। इस संधि के तहत तीन पूर्वी नदियां- सतलुज, रावी और व्यास- भारत को दी गईं, जबकि तीन पश्चिमी नदियां- सिंधु, झेलम और चिनाब- पाकिस्तान को आवंटित की गईं। इस व्यवस्था के तहत पाकिस्तान को 80% पानी मिलता है, जो उसकी कृषि, पेयजल और उद्योग के लिए बेहद जरूरी है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा इसी जल व्यवस्था पर निर्भर करता है। पूर्व जल संसाधन सचिव शशि शेखर ने कहा कि पाकिस्तान की जीडीपी का करीब एक चौथाई हिस्सा सिंधु जल संधि से मिलने वाले पानी पर आधारित है। उन्होंने कहा, “अगर यह संधि लंबे समय तक निलंबित रहती है, तो पाकिस्तान में आंतरिक अस्थिरता और असंतोष की स्थिति पैदा हो सकती है।”
पहलगाम आतंकी हमला: भारत की नीति में बड़ा बदलाव
भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले की जड़ें पहलगाम आतंकी हमले में हैं। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए इस हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत सरकार ने इसे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद करार दिया और जवाबी कार्रवाई की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया।पूर्व जल संसाधन सचिव शशि शेखर ने कहा कि उन्होंने 2016 में ही इस संधि पर पुनर्विचार की सिफारिश की थी, लेकिन उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सभी के लिए फायदेमंद बताते हुए इसे निलंबित करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी थी कि “पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।” पहलगाम आतंकी हमले के बाद यह चेतावनी आज सच होती दिख रही है।
पाकिस्तान की चेतावनी: जल प्रवाह रोका गया तो युद्ध माना जाएगा
पाकिस्तान ने अपने हालिया बयानों में कहा है कि सिंधु जल संधि के तहत जल प्रवाह में अगर कोई कमी की गई तो इसे “युद्ध की कार्रवाई” माना जाएगा। इस बयान से भारत-पाकिस्तान के रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए हैं। हालांकि, भारत ने साफ कर दिया है कि वह अब किसी भी तरह की “जल आधारित ब्लैकमेलिंग” को स्वीकार नहीं करेगा।
सिंधु जल संधि का भविष्य : पुनर्विचार या समाप्ति?
भारत ने पहले भी कहा है कि वह आपसी सहमति से सिंधु जल संधि की शर्तों पर पुनर्विचार करना चाहता है। भारत का कहना है कि पिछले 60 सालों में जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि और भौगोलिक बदलावों के कारण भारत की जल आवश्यकताएं काफी बढ़ गई हैं और संधि मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से असमान हो गई है।
इसलिए भारत चाहता है कि सिंधु जल संधि को नई तकनीकी और सामाजिक जरूरतों के आधार पर संशोधित किया जाए। लेकिन पहलगाम आतंकी हमले और पाकिस्तान की आतंकवाद नीति ने बातचीत की किसी भी संभावना को लगभग खत्म कर दिया है।
निष्कर्ष : भारत पाकिस्तान संबंध और जल कूटनीति का टकराव
भारत पाकिस्तान संबंध एक बार फिर ऐसे मोड़ पर आ गए हैं जहां जल कूटनीति और सुरक्षा नीति आमने-सामने खड़ी हैं। भारत का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति में कोई समझौता नहीं होगा। सिंधु जल संधि को स्थगित करना भारत की ओर से यह संकेत है कि अगर पाकिस्तान बातचीत करना चाहता है तो उसे सबसे पहले पहलगाम आतंकी हमले जैसी घटनाओं को हमेशा के लिए रोकना होगा पाकिस्तान के पास अब दो ही विकल्प हैं- या तो वह सीमा पार आतंकवाद को छोड़कर बातचीत की मेज पर आए या फिर सिंधु जल संधि को स्थगित करने के कारण होने वाले परिणामों के लिए तैयार रहे। इस जल विवाद ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब तक आतंकवाद का खात्मा नहीं हो जाता, तब तक शांति और सुलह की उम्मीद बेमानी है।
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Author: kamalkant
कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।







