पटना में भाजपा नेता और व्यवसायी गोपाल खेमका की हत्या :

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पटना में भाजपा नेता और व्यवसायी गोपाल खेमका की हत्या: नीतीश सरकार की कानून व्यवस्था पर उठे सवाल, तेजस्वी यादव ने साधा निशाना “बिहार में जंगलराज” – 

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पटना, 5 जुलाई, 2025 — बिहार की राजधानी पटना में भाजपा नेता और व्यवसायी गोपाल खेमका की गोली मारकर हत्या ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे रामगुलाम चौक के पास उनके आवास के बाहर बाइक सवार बदमाशों ने उन्हें बेहद नजदीक से गोली मार दी। घटना गांधी मैदान थाना क्षेत्र में हुई, जो थाने से महज 300 मीटर की दूरी पर है। गोपाल खेमका की हत्या ने न सिर्फ कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है।

— घटना की पूरी जानकारी

जानकारी के मुताबिक, गोपाल खेमका शुक्रवार रात बांकीपुर क्लब से अपने घर लौटे थे। जैसे ही वे अपनी कार से बाहर निकले, पहले से घात लगाए बैठे बाइक सवार अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। हमले में उन्हें गंभीर चोटें आईं और उन्हें तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। खेमका के अपार्टमेंट में तैनात गार्ड राम पारस ने मीडिया को बताया कि घटना रात करीब 11:30 बजे हुई, लेकिन पुलिस 2:30 बजे पहुंची। जबकि पटना पुलिस का दावा है कि गश्ती दल तुरंत मौके पर पहुंच गया था। गार्ड के बयान ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोपाल खेमका कौन थे? गोपाल खेमका पटना के एक प्रतिष्ठित व्यवसायी और वरिष्ठ भाजपा नेता थे। उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई की थी और फिर मगध अस्पताल की स्थापना करके स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में प्रवेश किया। हाजीपुर में उनका एक पेट्रोल पंप, कई दवा की दुकानें और दो कार्डबोर्ड कारखाने थे। उन्हें एक लो प्रोफाइल लेकिन प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। उनके बेटे गुंजन खेमका की भी 2018 में इसी तरह हत्या कर दी गई थी। भाजपा बिहार उद्योग प्रकोष्ठ के संयोजक गुंजन की हाजीपुर में उनकी फैक्ट्री के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय भी अपराधी बाइक पर सवार थे और घटना थाने से कुछ ही दूरी पर हुई थी। बेटे की मौत के बाद गोपाल खेमका ने राजनीति से दूरी बना ली थी और अपना कुछ कारोबार भी बेच दिया था।

— पुलिस की प्रतिक्रिया और जांच की स्थिति

घटना के बाद पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया है। आईजी जितेंद्र राणा ने मौके पर पहुंचकर जांच का जायजा लिया और कहा कि लापरवाह पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। एसपी (मध्य) दीक्षा ने बताया कि घटनास्थल से एक गोली और खोखा बरामद किया गया है और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।

शनिवार दोपहर एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने घटना की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया है, जिसकी निगरानी खुद एसपी दीक्षा कर रही हैं।

— नीतीश कुमार की समीक्षा बैठक

हत्या की खबर मिलते ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में डीजीपी विनय कुमार समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। नीतीश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अपराधियों को बिना किसी भेदभाव के जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और अगर किसी तरह की साजिश सामने आती है तो उसकी भी जांच की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

— भाजपा का गुस्सा : “जरूरत पड़ी तो एनकाउंटर भी होगा”

वरिष्ठ भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा खेमका के घर पहुंचे और परिवार से मुलाकात की और इसे कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बताया। उन्होंने कहा, “अब सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, जरूरत पड़ी तो एनकाउंटर भी होगा। अपराधी चाहे कहीं भी छिपे हों, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।”

— तेजस्वी यादव का हमला: “बिहार जंगल राज में तब्दील हो गया है”

राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा, “बिहार में हर दिन हत्याएं हो रही हैं, लेकिन मीडिया इसे जंगल राज क्यों नहीं कहता?” उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश कुमार सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं, उन्हें राज्य के बारे में कुछ पता नहीं है। तेजस्वी यादव ने भी खेमका के परिवार से मुलाकात की और उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा, “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बेहोशी की हालत में हैं और अफसरशाही ने उन्हें घेर रखा है। राज्य में अपराधी बेखौफ हैं और जनता असुरक्षित महसूस कर रही है।”

— कांग्रेस का बयान : कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त

कांग्रेस पार्टी ने भी घटना की निंदा की और कहा कि बिहार में अब अपराधियों का बोलबाला है। पार्टी नेताओं ने कहा कि भाजपा और नीतीश कुमार सरकार अपराधियों पर लगाम नहीं लगा पा रही है और इसकी कीमत पूरा राज्य चुका रहा है।

— एक परिवार पर दो हमले

खेमका परिवार पहले भी अपराधियों के निशाने पर रहा है। 2018 में बेटे गुंजन खेमका की हत्या और अब पिता गोपाल खेमका की हत्या ने संकेत दिया है कि यह सिर्फ कारोबारी प्रतिद्वंद्विता नहीं बल्कि एक सुनियोजित साजिश भी हो सकती है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि गोपाल खेमका के छोटे बेटे पर भी एक बार हमला हो चुका है, वह बाल-बाल बच गए ,हालांकि उस घटना में शामिल लोगों की भी हत्या कर दी गई।

— निष्कर्ष :

भाजपा नेता गोपाल खेमका की हत्या ने न केवल उनके परिवार को गहरे शोक में डाल दिया है, बल्कि बिहार की कानून व्यवस्था की गंभीर खामियों को भी उजागर किया है। विपक्ष ने एक बार फिर नीतीश कुमार की सरकार पर सवाल उठाए हैं, और जनता में भय और गुस्से का माहौल है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस मामले में तुरंत कार्रवाई कर दोषियों को सजा दिला पाती है या फिर यह मामला भी अन्य हाई-प्रोफाइल हत्याओं की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

 

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Author: Swatantra Vani

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