धुबरी सांप्रदायिक तनाव के बीच असम सरकार की सख्ती: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने देखते ही गोली मारने का आदेश दिया
गुवाहाटी, 14 जून, 2025:
असम के धुबरी जिले में चल रहा सांप्रदायिक तनाव अब भयावह रूप ले चुका है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बड़ा कदम उठाते हुए देखते ही गोली मारने का आदेश जारी किया है। ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अगले दिन 7 जून, 2025 को मंदिर के सामने गोमांस के टुकड़े मिलने के बाद से धुबरी में लगातार तनाव बना हुआ है।
मुख्यमंत्री सरमा ने साफ तौर पर कहा है कि किसी भी अवांछित गतिविधि पर देखते ही गोली मारने का आदेश लागू रहेगा- चाहे वह पत्थरबाजी हो, सांप्रदायिक भड़काना हो या कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश हो। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ऐसे किसी भी तत्व को नहीं बख्शेगी जो असम धुबरी में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है।

धुबरी में सांप्रदायिक तनाव की शुरुआत की वजह क्या है?
धुबरी में सांप्रदायिक तनाव 7 जून को शुरू हुआ, जब ईद के दिन हनुमान मंदिर के बाहर एक गाय का कटा हुआ सिर मिला था। स्थानीय हिंदू और मुस्लिम नेताओं ने मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया और दोनों समुदायों ने आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
लेकिन, 8 जून को एक बार फिर यही हरकत दोहराई गई। मंदिर के सामने फिर से गाय का सिर फेंका गया और रात में पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं। इससे साफ है कि यह महज संयोग नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 13 जून को खुद धुबरी का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने देखते ही गोली मारने का आदेश दिया। उन्होंने कहा, “अगर कोई व्यक्ति हिंसा फैलाने या कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सीधी कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि किसी को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा, “असम सरकार आपके साथ है।”
धुबरी में बांग्लादेश समर्थक पोस्टर लगाए गए, ‘नबीन बांग्ला’ कनेक्शन
सीएम सरमा ने यह भी खुलासा किया कि धुबरी में ‘नबीन बांग्ला’ नामक संगठन द्वारा कुछ पोस्टर चिपकाए गए हैं, जिनमें धुबरी को बांग्लादेश में विलय करने की मांग की गई है। इन पोस्टरों में लिखा था कि “धुबरी को बांग्लादेश का हिस्सा बनाना है, इसके लिए संघर्ष करें।” सरमा ने कहा, “इससे साफ पता चलता है कि विदेशी कट्टरपंथी ताकतें, खासकर बांग्लादेश की सीमा पार से आने वाले संगठन, धुबरी में सांप्रदायिक तनाव भड़काने के पीछे हैं।”
बीफ तस्करी और उभरता ‘बीफ माफिया’ नेटवर्क
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक और बड़ी साजिश का खुलासा करते हुए कहा कि धुबरी में बीफ तस्करी का एक नया नेटवर्क सक्रिय हो गया है। उन्होंने कहा, “बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल से हजारों गायों को लाया गया और अवैध रूप से काटा गया। यह नया बीफ माफिया नेटवर्क हमारे लिए चिंता का विषय है।” सरमा ने अधिकारियों को ऐसे किसी भी तस्कर को तुरंत गिरफ्तार करने और पूरे नेटवर्क की जांच करने का निर्देश दिया है।
38 लोगों की गिरफ्तारी और प्रशासनिक फेरबदल
इस मामले में अब तक 38 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मंदिर के पास गोमांस फेंकने की साजिश में एक आरोपी रमजान अली शेख को गिरफ्तार किया गया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए कहा, “धुबरी गोमांस मामले में 38 गिरफ्तारियां की गई हैं।”
इसके साथ ही असम के धुबरी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवीन सिंह का तबादला कर दिया गया है और उनकी जगह हैलाकांडी की एसपी लीना डोले को नियुक्त किया गया है।
देखते ही गोली मारने का आदेश: कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश
सरमा ने चेतावनी दी है कि देखते ही गोली मारने का आदेश विशेष रूप से रात के समय लागू रहेगा। उन्होंने कहा, “अगर कोई व्यक्ति रात में बाहर निकलता है, पत्थरबाजी करता है या कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश करता है, तो उसे देखते ही कार्रवाई की जाएगी।”
इसके साथ ही किसी भी तरह की हिंसा को रोकने के लिए असम के धुबरी में रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को तैनात किया गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ: विपक्ष की ओर से समर्थन और आलोचना दोनों
कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने भी देखते ही गोली मारने के आदेश का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, “ऐसे चरमपंथी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।” हालांकि, उन्होंने राज्य सरकार की खुफिया एजेंसियों की विफलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सरकार सतर्क होती तो धुबरी में सांप्रदायिक तनाव नहीं होता।
धुबरी का जनसांख्यिकी और भौगोलिक महत्व
असम का धुबरी जिला बांग्लादेश की सीमा से सटा हुआ है और मुस्लिम बहुल इलाका है। 2011 की जनगणना के अनुसार, यहाँ की 74% आबादी मुस्लिम समुदाय की है, जो ज्यादातर बंगाली भाषी हैं। सीमावर्ती इलाका होने के कारण यह हमेशा सुरक्षा और कानून व्यवस्था के प्रति संवेदनशील रहा है।
सीएम का वादा: “अगली ईद की रात मंदिर की सुरक्षा करूंगा”
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने साफ शब्दों में कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे अगले साल ईद की रात धुबरी में हनुमान मंदिर की व्यक्तिगत रूप से सुरक्षा करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं मंदिर की रक्षा करूंगा और यह सुनिश्चित करूंगा कि कोई भी दोबारा ऐसा कृत्य न कर सके।”
निष्कर्ष: कानून का शासन बहाल करने की कोशिश
धुबरी में सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए असम सरकार का रुख अब काफी सख्त हो गया है। शूट का आदेश जारी कर सरकार ने साफ संकेत दिया है कि सांप्रदायिक ताकतों, तस्करों और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने न सिर्फ सख्त कदम उठाए हैं, बल्कि जनता को भरोसा भी दिलाया है कि शांति व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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Author: kamalkant
कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।










