दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सुरक्षा मंजूरी रद्द करने के फैसले को ठहराया जायज़

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दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: तुर्की की सेलेबी कंपनी की याचिका खारिज, सुरक्षा मंजूरी रद्द करने के फैसले को ठहराया जायज़ – 

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नई दिल्ली: तुर्की की जानी-मानी ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को सोमवार को बड़ा झटका लगा, जब दिल्ली हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ सुरक्षा मंजूरी रद्द करने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस सचिन दत्ता ने याचिका खारिज करते हुए साफ कहा, “मैंने याचिका खारिज कर दी है।”

— सेलेबी की सुरक्षा मंजूरी क्यों रद्द की गई?

15 मई 2025 को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने तुर्की की इस कंपनी की सुरक्षा मंजूरी रद्द कर दी थी। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया था, जब पाकिस्तान को लेकर बढ़ते कूटनीतिक और सैन्य तनाव के कारण भारत और तुर्की के बीच संबंध काफी संवेदनशील हो गए थे। तुर्की ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का समर्थन किया था और आतंकी ठिकानों के खिलाफ भारत की कार्रवाई की आलोचना की थी। इसके तुरंत बाद भारत सरकार ने सुरक्षा कारणों से सेलेबी की मंजूरी रद्द कर दी थी।

इस फैसले का भारत के नौ प्रमुख एयरपोर्ट पर तत्काल प्रभाव पड़ा, जहां कंपनी ग्राउंड और कार्गो हैंडलिंग सेवाएं दे रही थी। इससे 10,000 से ज़्यादा कर्मचारियों की नौकरी भी ख़तरे में पड़ गई।

—अदालत में क्या हुआ ?

सेलेबी की ओर से पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि सुरक्षा मंज़ूरी को अचानक रद्द करना “प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन” है। उन्होंने कहा कि बीसीएएस के महानिदेशक (डीजी) को ऐसा आदेश पारित करने से पहले कंपनी को सुनवाई का मौक़ा देना चाहिए था।

रोहतगी ने यह भी कहा कि नागरिक उड्डयन सुरक्षा नियमों के नियम 12 का उल्लंघन किया गया है, जिसके लिए स्पष्ट प्रक्रिया का पालन किया जाना ज़रूरी है। उन्होंने अदालत से कहा:

  1. “यह आदेश एक ‘फ़रमान’ की तरह है, जिसमें कोई पूर्व सूचना या कारण नहीं दिया गया है। यह प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन है और इसमें कानून के हर पहलू की अनदेखी की गई है।”

कंपनी की ओर से यह भी दलील दी गई कि वह एक भारतीय कंपनी की तरह काम कर रही है, उसके सभी कर्मचारी भारतीय हैं और उसका संचालन पूरी तरह से भारत में हो रहा है।

—केंद्र सरकार का तर्क: सुरक्षा सर्वोपरि

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील दी कि वर्तमान में नागरिक उड्डयन क्षेत्र “अभूतपूर्व सुरक्षा खतरे” का सामना कर रहा है। इसलिए, बीसीएएस के निदेशक को सुनवाई का अवसर दिए बिना देश की सुरक्षा के हित में तत्काल कार्रवाई करने का “सुई जेनेरिस” (स्वतंत्र और विशेष) अधिकार है।

उन्होंने कोर्ट से कहा:

  1.  “ग्राउंड हैंडलिंग कंपनियों की पहुंच पूरे एयरपोर्ट और विमान तक है। अगर सुरक्षा में थोड़ी भी चूक होती है, तो पूरा देश खतरे में पड़ सकता है।” मेहता ने यह भी बताया कि जब सेलेबी ने नवंबर 2022 में अपनी सुरक्षा मंजूरी का नवीनीकरण किया था, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से सहमति व्यक्त की थी कि सरकार बिना कारण बताए कभी भी उनकी मंजूरी रद्द कर सकती है।

—सेलेबी के खिलाफ आरोप और स्पष्टीकरण

सेलेबी कंपनी पर तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन की बेटी सुमेये एर्दोआन से संबंध होने का भी आरोप लगाया गया था, जिसके कारण राजनीतिक एजेंडे का संदेह था। हालांकि, कंपनी ने इन दावों को पूरी तरह से नकार दिया और स्पष्ट किया कि सुमेये का कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है। कंपनी के अनुसार, कैन और कैनान सेलेबिओग्लू की सेलेबी में 17.5% हिस्सेदारी है और 65% हिस्सेदारी अंतरराष्ट्रीय संस्थागत निवेशकों के पास है।

—हाईकोर्ट का फैसला: “राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि”

सोमवार को फैसला सुनाते हुए जस्टिस सचिन दत्ता ने सेलेबी की याचिका को खारिज करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि बताया। कोर्ट ने सरकार की दलीलों को सही ठहराते हुए कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है, खासकर जब बात देश की संप्रभुता और सुरक्षा की हो।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब राष्ट्रीय हित और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं, तो कुछ मामलों में प्रक्रियात्मक न्याय के प्रावधानों को लचीला बनाया जा सकता है।

—सेलेबी का परिचय

नाम: सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

मुख्यालय: इस्तांबुल, तुर्की

भारत में परिचालन: 9 प्रमुख हवाई अड्डे

कर्मचारी संख्या: 10,000 से अधिक

सेवाएँ: ग्राउंड हैंडलिंग और कार्गो टर्मिनल प्रबंधन

—आगे क्या?

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद सेलेबी के लिए अब भारत में कानूनी और व्यावसायिक रूप से कारोबार जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। यह फैसला न केवल तुर्की की कंपनी के लिए बड़ा झटका है, बल्कि विदेशी कंपनियों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब भारत तुर्की के पाकिस्तान के प्रति झुकाव पर कड़ी नज़र रख रहा है और यह दर्शाता है कि भारत सरकार राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगी।

निष्कर्ष :

दिल्ली हाई कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला न केवल देश की सुरक्षा प्राथमिकताओं को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि विदेश नीति और कूटनीतिक संबंधों का व्यापारिक गतिविधियों पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। सेलेबी जैसी कंपनियों को अब भारतीय नीतियों और सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें भी इसी तरह के बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है।

 

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Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

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