दिल्ली-एनसीआर में लगातार दूसरे दिन भूकंप के झटके, हरियाणा का झज्जर पुनः बना केंद्र | रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.7 | लोगों में दहशत का माहौल –
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11 जुलाई 2025 की शाम को दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर भूकंप के झटकों से काँप उठा। हरियाणा के झज्जर जिले में शाम 7:49 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.7 मापी गई। यह भूकंप लगातार दूसरे दिन इसी इलाके में आया है, जिसने पूरे एनसीआर के लोगों को चिंता में डाल दिया है। 10 जुलाई को भी हरियाणा के झज्जर ज़िले में 4.4 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था। इस झटके का प्रभाव इतना व्यापक था कि इसके असर दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और मेरठ जैसे आसपास के क्षेत्रों में भी महसूस किए गए।
— दो दिन में दूसरा भूकंप, झज्जर फिर बना केंद्र
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, शुक्रवार शाम आए भूकंप का केंद्र हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित था। इसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर थी। शुक्रवार की शाम करीब 7 बजकर 49 मिनट पर दिल्ली-एनसीआर में एक और भूकंप दर्ज किया गया। यह गौर करने वाली बात है कि इससे कुछ ही घंटे पहले, गुरुवार की सुबह 9:04 पर भी हरियाणा के झज्जर इलाके में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। झज्जर में लगातार दो दिनों से आ रहे भूकंप ने भूकंपीय गतिविधियों को लेकर नई आशंकाओं और चर्चाओं को जन्म दिया है।
— भूकंप का विवरण :
दिनांक: 11/07/2025
समय: 19:49 IST
तीव्रता: 3.7
स्थान: झज्जर, हरियाणा
गहराई: 10 किमी
अक्षांश: 28.68° उत्तर
देशांतर: 76.72° पूर्व
—दिल्ली-एनसीआर में लोगों ने भूकंप के झटके कैसे महसूस किए?
दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत पूरे एनसीआर क्षेत्र में शाम को अचानक ज़मीन हिलती हुई महसूस हुई। सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने लिखा कि पंखे, खिड़कियाँ और लाइटें अचानक हिलने लगीं। कई लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए। ऊँची इमारतों में रहने वाले लोगों ने तेज़ झटके महसूस किए। एहतियात के तौर पर मेट्रो सेवाएँ कुछ मिनटों के लिए रोक दी गईं। हालाँकि किसी जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन लोगों में भय और चिंता का माहौल साफ़ दिखाई दे रहा था।
—भूकंप क्यों आते हैं?
पृथ्वी की सतह सात प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है, जो निरंतर गतिशील रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती या खिसकती हैं, तो पृथ्वी के भीतर तनाव उत्पन्न होता है। जब यह तनाव अचानक मुक्त होता है, तो वह ऊर्जा भूकंप के रूप में पृथ्वी की सतह पर पहुँचती है।
उत्तर भारत, खासकर दिल्ली-एनसीआर, हिमालय क्षेत्र के करीब स्थित है, जहाँ भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच लगातार टकराव होता रहता है। इसी वजह से इस क्षेत्र को भूकंप के प्रति संवेदनशील माना जाता है।
—दिल्ली भूकंप के प्रति संवेदनशील क्यों है?
दिल्ली को भूकंपीय जोखिम के लिहाज से क्षेत्र-IV में रखा गया है, जो कि एक संवेदनशील ज़ोन माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में सामान्य रूप से 5 से 6 तीव्रता वाले भूकंप आते रहते हैं। लेकिन, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, कुछ दुर्लभ मामलों में भूकंप की तीव्रता 7 या 8 रिक्टर तक भी पहुँच सकती है, जो भारी नुकसान का कारण बन सकती है।
दिल्ली में घनी आबादी, ऊँची इमारतों और बुनियादी ढाँचे की जटिलता के कारण भूकंप का खतरा और भी बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासनिक और नागरिक दोनों स्तरों पर सतर्कता बेहद ज़रूरी हो जाती है।
—भूकंप की तीव्रता और केंद्र क्या है ?
केंद्र: वह स्थान जो पृथ्वी की सतह पर उस बिंदु के ठीक ऊपर होता है जहाँ भूकंप की ऊर्जा उत्पन्न होती है। इसी स्थान पर झटके सबसे ज़्यादा महसूस किए जाते हैं।
तीव्रता: भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर मापी जाती है, जो आमतौर पर 1 से 9 तक होती है।
4.0 से कम – हल्का भूकंप
4.0-5.9 – मध्यम तीव्रता
6.0 से अधिक – गंभीर तीव्रता
—हिमाचल प्रदेश के चंबा में भी भूकंप
दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भी 11 जुलाई को सुबह 6:23 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसकी तीव्रता 3.5 मापी गई और गहराई 5 किलोमीटर थी। राहत की बात यह है कि किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।
भूकंप विवरण – चंबा, हिमाचल प्रदेश
दिनांक: 11/07/2025
समय: 06:23 IST
तीव्रता: 3.5
गहराई: 5 किलोमीटर
—फरवरी 2024 में भी आया था भूकंप
इससे पहले दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 17 फरवरी 2024 को सुबह 5:36 बजे भी भूकंप आया था, जिसकी तीव्रता 4.0 मापी गई थी। इसका केंद्र नई दिल्ली से 9 किलोमीटर पूर्व में था। उस समय भी लोगों में दहशत फैल गई थी और ठंड के बावजूद कई लोग अपने घरों से बाहर निकल आए थे।
दिनांक: 17-02-2024
समय: सुबह 5:36 IST
तीव्रता: 4.0
स्थान: नई दिल्ली से 9 किलोमीटर पूर्व
गहराई: 5 किलोमीटर
—भूकंप के दौरान क्या करें और क्या न करें?
क्या करें:
ज़मीन पर बैठें और किसी मज़बूत मेज़ या फ़र्नीचर के नीचे शरण लें।
सिर और गर्दन को हाथों से ढकें।
अगर आप खुली जगह पर हैं, तो खुले मैदान की ओर जाएँ।
किसी मज़बूत दीवार के पास रहें, लेकिन शीशे से दूर रहें।
क्या न करें:
लिफ्ट का इस्तेमाल न करें।
खिड़कियों और शीशों के पास न खड़े हों।
अफ़वाहों से बचें और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करें।
—वैज्ञानिकों की राय और चेतावनी।
भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर भारत में बढ़ती भूकंपीय गतिविधियाँ चिंता का विषय हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि भूकंपीय ज़ोन IV और V में आने वाले क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के लिए भूकंपरोधी मानकों का सख्ती से पालन करना ज़रूरी है।
इसके साथ ही, आम नागरिकों को भी आपदा प्रबंधन की बुनियादी जानकारी दी जानी चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में जान-माल का न्यूनतम नुकसान हो।
निष्कर्ष :
दिल्ली-एनसीआर में लगातार दो दिनों तक महसूस किए गए भूकंपों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। हालाँकि इन झटकों की तीव्रता ज़्यादा नहीं थी, लेकिन बार-बार आने वाले भूकंप भविष्य में किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि आम लोग सतर्क रहें, प्रशासन आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहे और वैज्ञानिक निर्देशों का पालन किया जाए। सतर्कता और तैयारी से ही इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है।
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Author: Swatantra Vani
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