ट्रैपिट बैंस ने लॉन्च किया OpenAI, मेटा में शामिल हुए 100 मिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट | जानिए ये आईआईटियन की पूरी कहानी :
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भारतीय मूल के ट्रैपिट बैसामन ने ओपनएआई को हटाया, मेटा के ‘सुपरटेलिजन’ यूनिट में शामिल
मत के अनुसार मेटा ने 100 मिलियन डॉलर का ऑफर दिया था
ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने मेटा पर चोरी का आरोप लगाया
ट्रैपिट बैसाख को OpenAI का “अत्यधिक प्रभावशाली” शोधकर्ता बताया गया है
— मेटा ने अपनी ” सुपरइंटलाइजेंस ” टीम के लिए बड़ा दांव खेला
भारतीय मूल के आर्टिफिशियल एसोसिएशन (एआई) मेकर ट्रैपिट बैसाखी ने दुनिया की अग्रणी एआई रिसर्च कंपनी ओपनएआई को मेटा (पूर्व में फेसबुक) की नई सुपरइंटेलिजेंस यूनिट का हिस्सा बनाया है। उन्होंने यह घोषणा 30 जून 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में) पर की थी। उन्होंने लिखा:
- “मेटा में शामिल होकर रोमांचित हूं! सुपरइंटेलिजेंस अब नजर आ रहा है।”
इस स्टेप से टेक जगत में हलचल मच गई है, क्योंकि मोटो ने दावा किया है कि मेटा ने बैसाख को $100 मिलियन (करीब ₹835 करोड़) का विशाल जॉइनिंग स्टोर ऑफर किया है।
—ट्रैपिट बैसाखी कौन हैं ?
ट्रैपिट बैसाखी का सफर एक साधारण छात्र से विश्व स्तर का एआई विशेषज्ञ बनने तक का है। उत्तर प्रदेश स्थित परमाणु ऊर्जा संयंत्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय, एमहर्स्ट से कंप्यूटर विज्ञान में स्नातकोत्तर और फिर पूरी तरह से अध्ययन किया।
शिक्षा के दौरान उन्होंने आईआईएससी कॉलेज, फेसबुक, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियों में इंटर्नशिप की। 2017 में उन्होंने ओपनएआई में चार महीने की इंटर्नशिप की और 2022 में फुल टाइम ज्वाइन किया।
ओपनएआई में बैसाख ने रिफोर्समेंट लर्निंग (आरएल) और तर्क-आधारित एआई मॉडल पर काम किया। उन्होंने ओपनएआई के को-फाउंडर इलिया सुत्सकेवर के साथ मिलकर कई शोध परियोजनाओं का नेतृत्व किया। उनके लिंक्डइन प्रोफ़ाइल के, वे एक गुप्त मॉडल ’01’ के सह-सर्जक भी रहे हैं, हालांकि इस मॉडल के बारे में अधिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
—ओपनएआई सीईओ का दावा: मेटा ने दिया 100 मिलियन डॉलर का ऑफर
ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में एक बयान में दावा किया है कि मेटा टॉप एआईपीएस को 100 मिलियन डॉलर का भारी भरकम ऑफर दिया गया है। उनके बैसाख और अन्य पूर्व OpenAI शोधकर्ताओं की ओर से थे।
हालांकि मेटा के सीटीओ एंड्रयू बोसवर्थ ने इन आरोपों को “झूठा” कहते हुए कहा कि ऑल्टमैन इस बात को बढ़ावा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी रिसर्चर्स को इतना बड़ा पैकेज नहीं दिया गया और ऑल्टमैन का दावा भ्रम फैलाया गया है।
—एआई उम्र में तेजी से बदलता हुआ राक्षस
एआई तकनीक की वैश्विक दौड़ में सोसाइटी के बीच साइबेरिया को लेकर प्रतिस्पर्धा बेहद तेज हो गई है। GPT-4 और GPT-5 जैसे मॉडल के बाद OpenAI ने टेक्नोलॉजी जगत में बड़ी जोड़ी बनाई, लेकिन अब मेटा भी पीछे नहीं रहना चाहता। मेटा की ‘सुपरइंटेलिजेंस’ यूनिट इसी प्रयास का हिस्सा है, जो एजीआई (आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस) की दिशा में काम कर रही है।
AGI यानी ऐसी मशीन जो किसी भी इंसान की तरह देखने, समझने और निर्णय लेने में सक्षम हो – AI का अंतिम लक्ष्य मनुष्य होता है। ट्रैपिट बैसाखी जैसे विशेषज्ञ को इस दिशा में काम करने वाली कंपनी की विशेष आवश्यकता है।
—बैसाख के योगदान: OpenAI के सबसे प्रभावशाली अवलोकन में से एक
टेकक्रंच की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रैपिट बैसामन को OpenAI के “अत्यधिक प्रभावशाली शोधकर्ता” के रूप में देखा जाता है। उन्होंने न केवल मजबूत एआई मॉडल बनाए बल्कि रिसर्च कल्चर को भी प्रेरित किया। उन्होंने कुछ प्रौद्योगिकी का उपयोग करके जीपीटी मॉडल की तर्क और सीखने की क्षमताओं को विकसित किया।
उनका शोध क्षेत्र नैचुरल लैंग्वेज मेमोरियल (एनएलपी), मेटा-लर्निंग, डीप लर्निंग और सुदृढीकरण सीखने पर केंद्रित है।
—ट्रैपिट बैसाख का भविष्य और मेटा का विवरण
मेटा में ट्रैपिट बैसामी की नई भूमिका सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह तय है कि वे एआई के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में काम करेंगे। मेटा की ‘सुपरइंटेलिजेंस’ टीम एजीआई जैसे कॉम्प्लेक्स ग्रुप को हासिल करने के लिए दुनिया भर के बेहतरीन दिमागों को एक साथ ला रही है।
बैसाख की जॉइनिंग से यह साफ है कि मेटा एआई में नंबर वन बनने के लिए कोई कसर नहीं।
—भारत के लिए गौरव का क्षण
ट्रैपिट बैसाख की यह सफलता भारत के लिए बहुत गर्व की बात है। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र ने न केवल दो प्रमुख एआई संस्थान में काम किया, बल्कि ऐसी जगह बनाई जहां उनकी प्रतिभा 100 मिलियन डॉलर की तरह अंकित से निकाली जा रही है।
उनकी सफलता हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो भारत से डिजिटल मंच पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।
—निष्कर्ष :
एआई की दुनिया में हो रही है ये खुलासा- इस बात का संकेत है कि टेक्नोलॉजी की अगली क्रांति अब साइबेरियाई युद्ध में बदल गई है। ट्रैपिट बैसाख का ओपनएआई मेटा में केवल एक नौकरी परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह बताता है कि किस तरह का एआई भविष्य तैयार किया जा रहा है – और इसमें भारतीय प्रतिभाएं एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
—ट्रैपिट बैसाखी प्रतिभाएं भारत वापस कैसे जाएं ?
ये एक बड़ा सवाल है. क्या कभी ऐसा समय आएगा जब इस तरह के विशेषज्ञ भारत में ही विश्व स्तरीय एआई प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे? यह नीति, आदर्श और शिक्षण के लिए विचार करने का विषय है।
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Author: Swatantra Vani
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