जेपी नड्डा का उत्तराधिकारी कौन ? भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए हलचल तेज :

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जेपी नड्डा का उत्तराधिकारी कौन? भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए हलचल तेज, हेमंत खंडेलवाल, रवींद्र चव्हाण और रामचंद्र राव जैसे नए चेहरे बने प्रदेश अध्यक्ष :

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नई दिल्ली:
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2025 के लिए बड़े संगठनात्मक बदलाव करते हुए अब तक 21 राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की है। इसके साथ ही पार्टी ने न केवल संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि अब जल्द ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर जेपी नड्डा की जगह किसी नए चेहरे की घोषणा हो सकती है।

पार्टी संविधान के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले कम से कम 50% राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति करना जरूरी है। चूंकि देश में कुल 37 संगठनात्मक इकाइयां (28 राज्य और 9 केंद्र शासित प्रदेश) हैं, इसलिए 19 राज्यों में नियुक्ति के बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। अब तक 21 राज्यों में नियुक्तियां हो चुकी हैं, जिसके चलते भाजपा ने नए अध्यक्ष के चयन की औपचारिक तैयारियां शुरू कर दी हैं।

—जेपी नड्डा का कार्यकाल और अगला चरण

जेपी नड्डा का कार्यकाल जनवरी 2024 में समाप्त हो गया था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने उनका कार्यकाल जून 2025 तक बढ़ा दिया था। अब जबकि संगठनात्मक चुनाव संपन्न हो चुके हैं, जुलाई के पहले सप्ताह में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर किसी नए चेहरे की नियुक्ति की पूरी संभावना है।

—भाजपा संगठन में नए प्रदेश अध्यक्षों की बाढ़

भाजपा द्वारा घोषित नए प्रदेश अध्यक्षों में कई चेहरे फिर से नियुक्त हैं तो कई बिल्कुल नए हैं। संगठनात्मक दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ इस प्रकार हैं:

अब तक नियुक्त नये प्रदेश अध्यक्षों की सूची:

प्रदेश के नए प्रदेश अध्यक्ष

महाराष्ट्र रवीन्द्र चव्हाण
मध्य प्रदेश हेमन्त खंडेलवाल
उत्तराखंड महेंद्र भट्ट (पुनः नियुक्त)
हिमाचल प्रदेश राजीव बिंदल (पुनर्नियुक्त)
तेलंगाना एन रामचंदर राव
आंध्र प्रदेश पीवीएन माधव
पुडुचेरी वीपी रामलिंगम
मिजोरम के बाइचुआ
अंडमान-निकोबार अनिल तिवारी
झारखंड बाबूलाल मरांडी
गुजरात सीआर पाटिल (पुनर्नियुक्त)
हरियाणा नायब सिंह सैनी
पंजाब अश्वनी शर्मा
राजस्थान भजनलाल शर्मा
छत्तीसगढ़ अरुण साव
ओडिशा सुब्रत पात्रा
गोवा सदानंद शेट तनावडे
त्रिपुरा राजीव भट्टाचार्य
मणिपुर थोंगम विश्वजीत
अरुणाचल प्रदेश तपिरा ताको
नागालैंड टेम्जेन इम्ना अलोंग

महाराष्ट्र: रवीन्द्र चव्हाण – चार बार के विधायक, मुख्यमंत्री फडणवीस के करीबी और पूर्व कैबिनेट मंत्री। जनवरी 2025 में उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया और अब वे स्थायी अध्यक्ष बन गए हैं।

मध्य प्रदेश: हेमंत खंडेलवाल – बैतूल से विधायक, वरिष्ठ भाजपा नेता विजय कुमार खंडेलवाल के बेटे। 16 साल में यह पहली बार है कि पार्टी ने किसी सांसद की जगह विधायक को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। वे शिवराज सिंह चौहान सरकार में विभिन्न भूमिकाएं निभा चुके हैं।

तेलंगाना: रामचंदर राव – पूर्व एमएलसी और एबीवीपी से जुड़े हैं। हालांकि विधायक टी राजा सिंह ने उनकी नियुक्ति पर नाराजगी जताई और पार्टी से इस्तीफा दे दिया, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इसे संगठन के संतुलन के तौर पर देखा।

आंध्र प्रदेश: पीवीएन माधव – पुराने संगठन कार्यकर्ता और पिछड़े वर्ग से आने वाले नेता। उन्होंने दग्गुबाती पुरंदेश्वरी की जगह ली है, जो भाजपा की पहली महिला प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की साली हैं।

इन चेहरों के जरिए पार्टी ने न सिर्फ जातिगत और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है, बल्कि यह भी दिखाया है कि वह संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं को प्रमुखता दे रही है। इस तरह भाजपा ने कुल 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संगठनात्मक पुनर्गठन पूरा कर लिया है, ताकि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो सके। हेमंत खंडेलवाल: शिवराज सिंह चौहान के विश्वासपात्र और संगठन के नायक हेमंत खंडेलवाल की नियुक्ति मध्य प्रदेश भाजपा के लिए बड़ा संकेत है। वे पूर्व सांसद विजय कुमार खंडेलवाल के बेटे हैं और 2008 में उपचुनाव जीतकर पहली बार राजनीति में आए थे। वे 2013 और 2023 में विधायक का चुनाव जीते। उन्हें शिवराज सिंह चौहान सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां सौंपी गईं। उन्होंने 2010 में बैतूल भाजपा जिला अध्यक्ष के तौर पर संगठन को मजबूत किया। वे भाजपा की कुशाभाऊ ठाकरे भवन निर्माण समिति के प्रमुख के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उनके अनुभव को देखते हुए पार्टी ने अब उन्हें राज्य की कमान सौंपी है।

—रवींद्र चव्हाण :   मराठा चेहरे के रूप में भाजपा का भरोसा

रवींद्र चव्हाण डोंबिवली से चार बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 2007 में पार्षद के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया और फिर 2009, 2014, 2019 और 2024 में लगातार विधानसभा चुनाव जीते। वे पूर्व में महायुति सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और देवेंद्र फडणवीस से नजदीकी के कारण उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।

चव्हाण की नियुक्ति के साथ भाजपा ने महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को लुभाने की कोशिश की है, जो राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है।

—रामचंदर राव :   संगठन के प्रति समर्पित लेकिन विवादों के केंद्र में

रामचंदर राव ने तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष का पदभार संभाला | वे छात्र राजनीति से संगठन में आए और लंबे समय तक एबीवीपी से जुड़े रहे। 2015 से 2021 तक विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) रहे। उनकी नियुक्ति पर भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने नाराजगी जताई, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने उनकी अनदेखी कर संगठन को प्राथमिकता दी।

—पीवीएन माधव :   आंध्र में संगठन का विस्तार करना लक्ष्य

पीवीएन माधव, जो अब भाजपा की आंध्र प्रदेश इकाई के नए अध्यक्ष बन गए हैं, संगठन के पुराने नायक हैं। उनकी नियुक्ति से पिछड़े वर्गों को विशेष महत्व मिलेगा। यह पिछड़े वर्गों से जुड़ने के प्रयास का हिस्सा है। उन्होंने दग्गुबाती पुरंदेश्वरी की जगह ली है, जिन्हें नंदमुरी तारक रामा राव की बेटी और चंद्रबाबू नायडू की साली के रूप में जाना जाता है।

—पार्टी की रणनीति :  सामाजिक संतुलन + संगठनात्मक पकड़

भाजपा ने जिन चेहरों को आगे किया है, उनमें जातिगत संतुलन साफ दिखाई दे रहा है:

रामचंदर राव – ब्राह्मण

हेमंत खंडेलवाल – सामान्य वर्ग

रवींद्र चव्हाण – मराठा

पीवीएन माधव – पिछड़ा वर्ग

पार्टी सभी सामाजिक समूहों में पैठ बनाने और संगठनात्मक मजबूती को आगे लाने की कोशिश कर रही है।

—भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष पद:  जेपी नड्डा का उत्तराधिकारी कौन हो सकता है ?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जेपी नड्डा की जगह भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा? जिन नामों की चर्चा जोर पकड़ रही है, वे इस प्रकार हैं:

नाम पृष्ठभूमि

भूपेंद्र यादव केंद्रीय मंत्री, संगठन पर मजबूत पकड़
विनोद तावड़े राष्ट्रीय महासचिव, संगठन निर्माण में कुशल
सुनील बंसल उत्तर प्रदेश और बंगाल में संगठन को मजबूत किया
ओम माथुर वरिष्ठ संगठन नेता, राजस्थान से आते हैं

भूपेंद्र यादव और विनोद तावड़े को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम फैसला आरएसएस और भाजपा की कोर कमेटी की सहमति से लिया जाएगा।

—जल्द ही नियुक्तियां :  यूपी, बिहार, बंगाल पर नजर

अभी जिन प्रमुख राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा बाकी है, वे हैं:

उत्तर प्रदेश – चर्चा में: दिनेश शर्मा, स्वतंत्र देव सिंह

बिहार – चर्चा में: संजीव चौरसिया, नित्यानंद राय

पश्चिम बंगाल – चर्चा में: सुकांत मजूमदार (पुनर्नियुक्ति संभव), अग्निमित्रा पॉल

इन राज्यों में जल्द ही संगठनात्मक बदलाव की घोषणा की जाएगी, जिसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।

—निष्कर्ष :

भाजपा के संगठन में हो रहे बदलाव 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव और 2029 के आम चुनाव की तैयारी का संकेत हैं। जेपी नड्डा के कार्यकाल के अंतिम चरण में पार्टी अब ऐसे नेता को आगे लाना चाहती है, जो न सिर्फ संगठन को संभाले, बल्कि सरकार और सहयोगी दलों के बीच संतुलन भी बनाए रखे। ऐसे में हेमंत खंडेलवाल, रवींद्र चव्हाण, रामचंदर राव, पीवीएन माधव जैसे नेताओं को नियुक्त कर पार्टी ने जमीनी संगठन में नई जान फूंकने का संदेश दिया है।

 

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Author: Swatantra Vani

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