जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हो सकता है बड़ा फैसला

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जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में 12% जीएसटी स्लैब हटाने पर हो सकता है विचार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हो सकता है बड़ा फैसला

देश की जीएसटी काउंसिल एक बार फिर बड़े सुधार की ओर कदम बढ़ा सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आगामी बैठक में 12% जीएसटी स्लैब को हटाने और पूरे जीएसटी ढांचे को चार से तीन स्लैब में शामिल करने पर विचार किया जाएगा। इस ऐतिहासिक फैसले की अगुआई खुद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी। इस फैसले को रेवेन्यू न्यूट्रल टैक्स स्ट्रक्चर की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हो सकता है बड़ा फैसला

जीएसटी काउंसिल की बैठक जून के आखिर या जुलाई में संभावित

जानकारी के मुताबिक, जीएसटी काउंसिल की बैठक जून के आखिर या जुलाई में हो सकती है। यह बैठक काफी अहम होगी क्योंकि इसमें 12% जीएसटी स्लैब को हटाकर टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाने पर चर्चा होगी। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी, जिसमें विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्री शामिल होंगे।

गौरतलब है कि जीएसटी परिषद की पिछली बैठक दिसंबर 2024 में हुई थी और उसके बाद यह पहली बैठक होगी जिसमें निर्मला सीतारमण और राज्यों के प्रतिनिधियों के बीच कई ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होगी।

12% जीएसटी स्लैब हटाने का प्रस्ताव

जीएसटी परिषद के समक्ष जो सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा जा सकता है, वह है 12% जीएसटी स्लैब को खत्म करना। इस प्रस्ताव के अनुसार, 12% स्लैब में शामिल वस्तुओं और सेवाओं को या तो 5% स्लैब में रखा जाएगा या 18% स्लैब में शामिल किया जाएगा।

निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली दरों को तर्कसंगत बनाने पर मंत्रियों की समिति (जीओएम) ने इस दिशा में ठोस सुझाव दिए हैं। विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार, 12% स्लैब अब अप्रासंगिक हो गया है और इससे जीएसटी परिषद के निर्णय का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

मौजूदा जीएसटी ढांचे में 12% स्लैब की भूमिका

भारत की मौजूदा जीएसटी प्रणाली को चार प्रमुख कर स्लैब में विभाजित किया गया है – 5%, 12% जीएसटी स्लैब, 18% और 28%। इसके अलावा, कुछ वस्तुओं पर 0% कर दर भी लागू है। 12% जीएसटी स्लैब में वे वस्तुएं शामिल हैं जो न तो बहुत ज़रूरी हैं और न ही विलासिता की श्रेणी में आती हैं।

इनमें शामिल हैं – गाढ़ा दूध, कैवियार, 20 लीटर की बोतलों में पैक पानी, वॉकी-टॉकी, फर्नीचर, छाते, पेंसिल, हैंडबैग, जूते (₹1000 से कम), डायग्नोस्टिक किट, संगमरमर और ग्रेनाइट ब्लॉक और कुछ खाद्य उत्पाद जैसे नमकीन, भुजिया, करी पेस्ट, पास्ता, जैम, सॉसेज आदि।

सेवाओं में भी, होटल के कमरे (₹7,500 प्रतिदिन तक), गैर-किफायती हवाई यात्रा, विशेष निर्माण सेवाएँ आदि 12% जीएसटी स्लैब के अंतर्गत आते हैं।

निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीओएम की सिफारिश

जीएसटी परिषद के निर्देशन में गठित जीओएम ने लखनऊ में 45वीं बैठक के बाद 24 सितंबर 2021 को कार्यभार संभाला। इस समिति का उद्देश्य कर दरों को सरल बनाना, शुल्क व्युत्क्रम को सही करना और जीएसटी परिषद को उचित सुझाव देना था।

समिति के संयोजक पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई थे, बाद में जिनकी जगह सुरेश कुमार खन्ना (उत्तर प्रदेश) और फिर सम्राट चौधरी (बिहार) ने ले ली।

जीओएम और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि 12% जीएसटी स्लैब की अब जरूरत नहीं है और इसे हटाने से राजस्व तटस्थ कर ढांचे के लक्ष्य में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

कर विशेषज्ञ सौरभ अग्रवाल (ईवाई इंडिया) ने कहा, “जीएसटी परिषद की आगामी बैठक में 12% जीएसटी स्लैब को हटाने और तीन-दर प्रणाली लागू करने पर जोर हो सकता है। इससे अनुपालन में सुधार होगा और वर्गीकरण विवाद कम होंगे।”

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में संतुलन जरूरी होगा। क्योंकि 12% जीएसटी स्लैब में शामिल वस्तुएं और सेवाएं आम उपभोक्ताओं की जरूरत हैं और इन्हें हटाकर 18% में ले जाने से महंगाई बढ़ सकती है। अग्रवाल ने आगे कहा, “अगर इन वस्तुओं को 18% स्लैब में रखा जाता है, तो इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। वहीं, 5% स्लैब में शिफ्ट होने से सरकार को राजस्व का नुकसान हो सकता है। इसलिए जीएसटी काउंसिल को फैसला लेने से पहले गहन विश्लेषण करना होगा।”

जीएसटी संग्रह में रिकॉर्ड वृद्धि , टैक्स स्लैब में सुधार की राह साफ

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में देश की जीएसटी प्रणाली ने हाल के वर्षों में जबरदस्त मजबूती दिखाई है। 2023-24 में ₹20.18 लाख करोड़ का कुल संग्रह हुआ, जो 2024-25 में बढ़कर ₹22.08 लाख करोड़ तक पहुंच गया — यानी लगभग 9% की वृद्धि।

अप्रैल 2025 में ₹2.36 लाख करोड़ और मई 2025 में ₹2.01 लाख करोड़ की वसूली के साथ जीएसटी संग्रह ने ऐतिहासिक स्तर छू लिए हैं।

इस मजबूत राजस्व के आधार पर सरकार अब 12% जीएसटी स्लैब को हटाने जैसे संरचनात्मक सुधारों पर विचार कर सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कर ढांचे का सरलीकरण भारत को अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब ले जाएगा, जहां अधिकतर देशों में एक या दो कर दरें ही लागू होती हैं।

जीएसटी परिषद अब तीन स्लैब प्रणाली की ओर बढ़ सकती है, जो टैक्स व्यवस्था को और पारदर्शी, सरल और प्रभावी बना सकती है — एक ऐसा कदम जो भारत के आर्थिक सुधारों में मील का पत्थर साबित होगा।

निष्कर्ष

देश में कर सुधारों की दिशा में निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद लगातार सक्रिय है। अब जब यह चर्चा जोरों पर है कि 12 फीसदी जीएसटी स्लैब को हटाकर तीन दरों वाला राजस्व तटस्थ कर ढांचा लाया जाएगा, तो इससे कर ढांचा और सरल और पारदर्शी होगा, वहीं कारोबारियों और उपभोक्ताओं दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। हालांकि यह फैसला जितना चुनौतीपूर्ण है, उतना ही साहसिक भी है। इसे लागू करने से पहले निर्मला सीतारमण और जीएसटी परिषद को उद्योग जगत के साथ गहन चर्चा, विश्लेषण और संवाद की जरूरत होगी। अगर यह कदम सोच-समझकर उठाया जाता है, तो यह भारत की जीएसटी प्रणाली को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और अधिक समावेशी बना सकता है।

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Author: kamalkant

कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।