Ganga में ट्रैफिक कंट्रोल के लिए तीन किलोमीटर लंबा वाटर डिवाइडर, 84 घाटों की होगी नाकाबंदी
Varanasi News – Ganga नदी में बढ़ते जल यातायात और लगातार बढ़ रही भीड़ को देखते हुए अब ट्रैफिक कंट्रोल की ठोस व्यवस्था लागू होने जा रही है। काशी में हर दिन देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। दशाश्वमेध घाट की Ganga आरती के बाद नमो घाट पर शुरू होने वाली आरती के दौरान Ganga में नावों की भारी आवाजाही होती है। ऐसे में हादसों की आशंका को कम करने और सुचारु यातायात व्यवस्था के लिए Ganga में तीन किलोमीटर लंबा ‘वाटर डिवाइडर’ बिछाने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही आठ किलोमीटर के दायरे में पड़ने वाले 84 घाटों की नाकाबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जाएगी।
प्रशासन और जल पुलिस की इस नई पहल के बाद Ganga में पहली बार ट्रैफिक सिस्टम स्पष्ट रूप से नजर आएगा। नावों के आने और जाने के रास्ते अलग-अलग होंगे। इसके लिए तीन किलोमीटर जल क्षेत्र में फ्लोटिंग जेटी के माध्यम से लेन डिवाइड की जाएगी। इससे नावों के आमने-सामने आने और टकराने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी स्थिति में नाव वाटर डिवाइडर से टकरा भी जाती है, तो फ्लोटिंग जेटी में पानी भरा होने के कारण किसी बड़े हादसे की आशंका नहीं रहेगी।
पर्यटकों की बढ़ती संख्या बनी वजह
काशी में हर साल पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या करोड़ों तक पहुंच रही है। वर्तमान में Ganga में रजिस्टर्ड क्रूज, बजड़ा, हाथ नाव और मोटर बोट की कुल संख्या 2095 तक जा पहुंची है। इसी को ध्यान में रखते हुए जल पुलिस ने विस्तृत ट्रैफिक प्लान तैयार किया है। आठ किलोमीटर क्षेत्र में 84 घाटों की सुरक्षा के लिए पहले से ही 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली स्पीड बोट तैनात की गई है। इसके अलावा जल पुलिस बल की संख्या 32 से बढ़ाकर 100 किए जाने की तैयारी है।
इस तरह बनाई जाएगी डिवाइडर लेन
वाटर डिवाइडर को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए तीन किलोमीटर क्षेत्र में पहले मजबूत जाल बिछाया जाएगा। इसके ऊपर फ्लोटिंग जेटी लगाकर दो अलग-अलग लेन तैयार की जाएंगी। पानी भरने के बाद एक फ्लोटिंग जेटी का वजन औसतन साढ़े तीन सौ किलो होगा। यदि किसी कारणवश डिवाइडर लेन के पास हादसा होता है, तो फ्लोटिंग जेटी के नीचे लगा मजबूत जाल लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाएगा।
घाटों पर भी लगेंगी फ्लोटिंग जेटी
Ganga में हर वर्ष स्नान के दौरान डूबने से बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है। इसे रोकने के लिए घाटों पर भी फ्लोटिंग जेटी लगाने की योजना है। खतरे के निशान से पहले मजबूत जाल बिछाकर फ्लोटिंग जेटी लगाई जाएगी। इसके ऊपर चमकने वाले उपकरण लगाए जाएंगे, ताकि अंधेरे में भी लोग खतरे की सीमा को आसानी से पहचान सकें। इससे दुर्घटनाओं में काफी कमी आने की उम्मीद है।
वीवीआईपी सुरक्षा में भी मिलेगी मदद
काशी में आने वाले पर्यटकों में वीआईपी और वीवीआईपी की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। कई बार इन्हें Ganga के रास्ते लाने-ले जाने के दौरान अन्य नावों की वजह से सुरक्षा में दिक्कत आती है। Ganga में ट्रैफिक व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी समस्याएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी। अधिकारियों के अनुसार वाटर डिवाइडर नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित नहीं करेगा, बल्कि उसे नियंत्रित और संतुलित बनाए रखेगा।
प्रशासन मंगा रहा पोंटून नाव
जल यातायात को और मजबूत करने के लिए प्रशासन अपनी नावों की संख्या भी बढ़ा रहा है। स्पीड बोट और मोटर बोट के अलावा अब पोंटून नाव मंगाई जा रही हैं। इससे पहले केरल की एक कंपनी द्वारा आपूर्ति की गई नावों में कुछ कमियां पाई गई थीं, जिसके बाद उन्हें वापस कर दिया गया। अब जल्द ही नई पोंटून नावें Ganga में दौड़ती नजर आएंगी।
कितना सुरक्षित है वाटर डिवाइडर
- वाटर डिवाइडर प्लास्टिक से निर्मित होगा और इसमें पानी भरा रहेगा।
- टक्कर की स्थिति में यह कंक्रीट की तरह नुकसान नहीं पहुंचाता।
- यह वाहनों की गति कम करने में मददगार होता है।
- लचीला होने के कारण झटका भी कम लगता है।
नंबर गेम :
- 15 क्रूज
- 205 बजड़ा (डबल डेकर)
- 195 हाथ नाव (चप्पू बोट)
- 1675 मोटर बोट
Ganga में लागू होने जा रही यह नई व्यवस्था न सिर्फ यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि श्रद्धालुओं, पर्यटकों और नाविकों की सुरक्षा को भी एक नई मजबूती देगी। स्वतंत्र वाणी News के परिणामस्वरूप से यह कदम Ganga प्रबंधन की दिशा में एक अहम बदलाव माना जा रहा है।
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Author: Rajesh Srivastava
राजेश श्रीवास्तव एक अनुभवी और दूरदर्शी एडिटर इन चीफ हैं, जिन्हें पत्रकारिता और संपादन का गहरा अनुभव प्राप्त है। कई वर्षों की सक्रिय भूमिका के साथ, वे समाचारों की गुणवत्ता, निष्पक्षता और प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। राजेश का उद्देश्य संपादकीय नेतृत्व के माध्यम से सच्ची और संतुलित जानकारी पाठकों तक पहुँचाना है। उनके मार्गदर्शन में प्रकाशित सामग्री में स्पष्टता, विश्वसनीयता और सामाजिक जिम्मेदारी का समावेश होता है, जो उन्हें एक प्रभावशाली और विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।








