खुफिया एजेंसी रॉ को मिला नया चीफ :

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

खुफिया एजेंसी रॉ को मिला नया चीफ: ऑपरेशन सिंदूर के रणनीतिकार आईपीएस पराग जैन बने नए रॉ चीफ, जानें उनका अब तक का सफर – 

-नई दिल्ली, 28 जून, 2025:
भारत की सबसे गोपनीय और रणनीतिक खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) को नया चीफ मिल गया है। केंद्र सरकार ने शनिवार को पराग जैन को रॉ चीफ नियुक्त किया। पराग जैन एक अनुभवी और कुशल आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्हें खुफिया और सुरक्षा जगत का लंबा अनुभव है। उन्हें खासतौर पर ऑपरेशन सिंदूर में उनकी केंद्रीय भूमिका के लिए जाना जाता है।

अब जबकि पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद एक बार फिर सक्रिय हो रहा है, पराग जैन की रॉ चीफ के तौर पर नियुक्ति को भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से निर्णायक कदम माना जा रहा है।

🛡️ कौन हैं पराग जैन ?

पराग जैन 1989 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हैं और पंजाब कैडर से हैं। 35 साल से अधिक की अपनी सेवा में उन्होंने खुफिया, सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं।

वे वर्तमान में रॉ के एविएशन रिसर्च सेंटर (ARC) के प्रमुख हैं, जो सीमा पार निगरानी, सैटेलाइट इमेजिंग और हवाई खुफिया जानकारी जुटाने का काम करता है। उनकी विशेषज्ञता खास तौर पर पाकिस्तान से जुड़े मामलों में रही है।

🔥 ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका –

ऑपरेशन सिंदूर वर्ष 2025 में पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों के खिलाफ भारत द्वारा की गई एक सटीक जवाबी कार्रवाई थी। भारत सरकार ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आत्मघाती हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद यह ऑपरेशन शुरू किया था।

इस हमले की साजिश पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों से जुड़ी हुई थी। इसके बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने चार दिनों तक सीमा पार आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर सर्जिकल स्ट्राइक की। इस कार्रवाई की रणनीति और सफलता के पीछे पराग जैन और उनकी टीम की खुफिया तैयारी को अहम माना गया।

रॉ चीफ के तौर पर उनकी नियुक्ति के बाद यह साफ हो गया है कि भारत अब आतंकी गतिविधियों के प्रति और भी ज्यादा आक्रामक और रणनीतिक रुख अपनाने जा रहा है।

🏛️ पंजाब में आतंकवाद के दौर से रॉ तक का सफर :

पराग जैन ने पंजाब में अपने पुलिस करियर की शुरुआत की, जब राज्य आतंकवाद की चपेट में था। उन्होंने बठिंडा, मानसा, होशियारपुर, चंडीगढ़ और लुधियाना जैसे जिलों में एसएसपी और डीआईजी के तौर पर काम किया। इस दौरान उन्होंने कई खालिस्तानी आतंकी मॉड्यूल को ध्वस्त किया और गुप्त सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई की।

रॉ में शामिल होने के बाद उन्होंने खास तौर पर पाकिस्तान डेस्क पर काम किया और जम्मू-कश्मीर में बेहद संवेदनशील ऑपरेशन का हिस्सा रहे, खासकर 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाने के दौरान।

🌍 अंतरराष्ट्रीय अनुभव: श्रीलंका और कनाडा में रॉ की निगरानी –

रॉ चीफ बनने से पहले पराग जैन ने विदेश में भी काम किया। कनाडा और श्रीलंका में भारतीय मिशन में तैनात रहते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आतंकी मॉड्यूल की निगरानी की। खास तौर पर कनाडा में उन्होंने खालिस्तानी संगठनों पर नजर रखी और समय रहते भारत सरकार को आगाह किया कि वहां खालिस्तान समर्थक गतिविधियां बढ़ रही हैं।

उनकी रिपोर्ट के आधार पर भारत ने कनाडा सरकार से कूटनीतिक बातचीत तेज की और खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

📉 नई दिशा क्यों जरूरी थी?

पूर्व रॉ चीफ रवि सिन्हा का कार्यकाल अपेक्षाकृत शांत और कमजोर माना गया। मालदीव संकट, बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता और पहलगाम हमले जैसी घटनाओं के दौरान एजेंसी की प्रतिक्रिया पर सवाल उठे। इसके बाद केंद्र सरकार को खुफिया एजेंसी के नेतृत्व में बदलाव की जरूरत महसूस हुई।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पराग जैन की कार्यशैली, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी के बेहतर संयोजन ने उन्हें रॉ चीफ के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार बनाया।

🤝 नई चुनौतियां, नया नेतृत्व :

भारत की बाहरी सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। पाकिस्तान के नए फील्ड मार्शल असीम मुनीर का लक्ष्य भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद को और बढ़ावा देना है। भारत ने हाल ही में सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

🔹ऐसी स्थिति में भारत को एक ऐसे रॉ प्रमुख की जरूरत थी जो :

पाकिस्तान की रणनीति को गहराई से समझता हो

खालिस्तानी और इस्लामिक आतंकी मॉड्यूल पर कड़ी नजर रखता हो

जमीनी स्तर पर खुफिया नेटवर्क को मजबूत कर सकता हो

और ऑपरेशनल फैसले लेने में तेज हो

पराग जैन इन सभी अपेक्षाओं पर खरे उतरते हैं।

🔍 भविष्य की रणनीति: HUMINT + TECHINT का संतुलन –

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में रॉ को न केवल तकनीकी खुफिया जानकारी (TECHINT) बल्कि मानव स्रोतों से मिलने वाली जानकारी (HUMINT) पर भी बराबर ध्यान देना होगा।

पराग जैन को दोनों क्षेत्रों में संतुलन बनाने का अनुभव है। ARC प्रमुख के तौर पर उन्होंने तकनीकी निगरानी को और मजबूत किया, जबकि पंजाब और कश्मीर में SSP और DIG के तौर पर जमीनी स्तर पर काम किया।

🔚 निष्कर्ष :

पराग जैन की रॉ चीफ के तौर पर नियुक्ति न केवल एक अनुभवी अधिकारी को श्रद्धांजलि है, बल्कि यह भारत की खुफिया रणनीति को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी भी है। ऑपरेशन सिंदूर जैसी सर्जिकल स्ट्राइक और भविष्य की कूटनीतिक और सैन्य चुनौतियों के मद्देनजर यह फैसला देश की सुरक्षा को मजबूत करने वाला कदम है। उनकी नियुक्ति से यह संदेश मिलता है कि अब भारत सिर्फ रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक और रणनीतिक सोच के साथ आगे बढ़ेगा।

(खबरों के लाइव अपडेट और विस्तृत विश्लेषण के लिए स्वतंत्र वाणी पर बने रहें।)
Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

“स्वतंत्र वाणी” – जहाँ सच की आवाज़ कभी दबती नहीं। स्वतंत्र वाणी एक स्वतंत्र ऑनलाइन समाचार और ब्लॉग मंच है, जिसका उद्देश्य है पाठकों तक सही, निष्पक्ष और ताज़ा जानकारी पहुँचाना। यहाँ राजनीति, शिक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य, मनोरंजन, खेल और लाइफ़स्टाइल से जुड़ी हर महत्वपूर्ण ख़बर और जानकारी आसान भाषा में प्रस्तुत की जाती है। हम मानते हैं कि सच्चाई कभी दबाई नहीं जा सकती, इसलिए हमारा हर लेख और ख़बर तथ्यों पर आधारित होती है, ताकि पाठकों तक भरोसेमंद और निष्पक्ष पत्रकारिता पहुँच सके।