कुणाल शाह की प्रॉपर्टी और क्रेडिट के ₹5,215 करोड़ की कमाई पर घटिया बहस:

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कुणाल शाह की प्रॉपर्टी और क्रेडिट के ₹5,215 करोड़ की कमाई पर घटिया बहस: भारत के इस फिनटेक की रणनीति में क्या शामिल है ?

 

भारत के जाने-माने फिनटेक स्टार कुणाल शाह की कुल संपत्ति और उनके टेक्सेंट्स की वित्तीय स्थिति एक बार फिर से मजबूत हो गई है। इसकी शुरुआत एक वायरल लिंक्डइन पोस्ट से हुई, जिसे डेलॉइट के वरिष्ठ सलाहकार आइडियल समालोपनन ने लिखा है। इस पोस्ट में शाह की दो बड़ी फिनटेक कंपनियां – फ्रीचार्ज और सीआरईडी – के भारी घाटों और लाभ की गारंटी को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

—फ्रीचार्ज की कहानी: भारी रेवेन्यू, लेकिन घाटा

कुणाल शाह ने 2010 में फ्रीचार्ज की स्थापना की थी। यह भारत में कैशबैक मॉडल पर आधारित एक लोकप्रिय मोबाइल प्लेटफ़ॉर्म था। 2015 तक, फ्रीचार्ज ने ₹35 करोड़ का राजस्व नवीनीकृत किया, लेकिन इसके साथ ही ₹269 करोड़ का घाटा भी हुआ, जिसके कारण उनका आक्रामक कैशबैक और बाजार स्टॉक मॉडल जारी रहा।

फ्रीचार्ज को 2015 में स्नैपडील ने ₹2,800 करोड़ में खरीदा था, लेकिन सिर्फ दो साल बाद 2017 में एक्सिस बैंक ने इसे सिर्फ ₹370 करोड़ में खरीदा। इस प्रोक्योरमेंट-फ़ारोख्त ने स्ट्रेचर प्रोडक्शन और लार्गे टर्म सस्टेनेबिलिटी पर गंभीर सवाल उठाए।

—CRED और ₹5,215 करोड़ का घाटा: शाह की रणनीति में मसाले के गोले

अब आलमारी नजर कुणाल शाह की बेस्ट स्टैच्यू क्रेडिट पर है, जिसकी शुरुआत 2018 में हुई थी। यह प्लेटफॉर्म क्रेडिट कार्ड पैलेम्स को एक प्रीमियम फिनटेक ब्रांड के रूप में शामिल किया गया है और इसे आधिकारिक तौर पर पेश किया गया है।

लिंक्डइन पोस्ट के अनुसार, CRED ने अब तक ₹4,493 करोड़ का रेवेन्यू तो डाउनलोड किया है, लेकिन साथ ही ₹5,215 करोड़ का घाटा भी झेला है। ये जहरीले पदार्थ पिछले सात वर्षों में लगातार बने हुए हैं।

समालोपनन ने सवाल किया कि “जब एक भी वित्तीय वर्ष में लाभ नहीं हुआ, तब भी कुणाल शाह लगातार पद पर क्यों जा रहे हैं?”

—कुणाल शाह का जवाब: आलोचना को लेकर जोखिम उठाने की बात

इस बार खुद कुणाल शाह ने लिंक्डइन पोस्ट पर दिया जवाब, जो था उनके लिए एक अहम कदम। उन्होंने कहा:

  1.  “बिलकुल सही। उन हजारों कलाकारों को भी सेलिब्रेट करना चाहिए जो बिना बाहरी निवेश के हमसे जुड़े हुए हैं।”

 

उन्होंने आगे लिखा कि एंटरप्राइजिता रिस्क लेने का नाम है, खासकर उस युग में जहां एआई के बाद नौकरी की स्थिरता भी खत्म हो सकती है। शाह ने ये भी जोड़ा:

“अधिक से अधिक जॉब क्रिएटर्स का उपयोग करें।”

 

— कुड़ाल शाह की 2025 में कुल संपत्ति : आंकड़े और हकीकत :

 

हालांकि CRED और फ्रीचार्ज जैसे पिक्चर्स के फाइनेंसियल डाटा नेगेटिव चल रहे हैं, लेकिन कुणाल शाह की कुल संपत्ति का आकार लगभग ₹5,000 करोड़ (लगभग $600 मिलियन) आंका गया है। यह दस्तावेज़ मुख्यतः CRED में उनके स्टॉक में रखे गए स्टॉक पर आधारित है।

विशेषज्ञ का मानना ​​है कि शाह की संपत्ति का यह अनुमान अस्थिर है और यह बाजार में शेयरधारकों, निवेशकों के सामान और कंपनी के शेयरों के अनुसार ऊपर-नीचे होता रहता है।

—CRED की वित्तीय रणनीति: निर्माण या ब्रह्माण्ड?

CRED का सबसे बड़ा मॉडल शुरुआत से ही ग्राहक अनुभव और ब्रांडिंग पर आधारित है। कंपनी ने मार्केटिंग, स्पॉन्सरशिप और ऑटोमोबाइल इनसेंटिव पर भारी खर्च किया है। इसके बदले में CRED को उच्च वैल्यूएशन और फंडिंग राउंड में निवेशकों का समर्थन मिला है।

लेकिन सवाल यह है कि घाटा में इतनी बड़ी मात्रा में कोई भी फोटोग्राफर के रूप में टिक नहीं सकता है?

—भारत में ट्रेलर और लाभ की प्रबलता की चाहत

CRED इको कंपनी नहीं है जो स्कोटिया में चल रही है। पेटीएम, जोमैटो, स्विगी और फ्लिपकार्ट जैसी कई कंपनियां लंबे समय से घाटे में चल रही हैं। विपक्ष का तर्क है कि “विकास पहले, विकास बाद में” की रणनीति भारत की तरह उन्नत बाजार में समकक्ष है।

हालाँकि, इसमें आम लोग और छोटे व्यापारी अब भी मौजूद हैं:

केवल दस्तावेज़ीकरण के लिए क्या दस्तावेज़ बनाए जा रहे हैं?

इकाइयों की मशीनें क्या हैं?

आम जनता के पैसे के उपयोग की सही दिशा क्या हो रही है?

 

—समालोपनन की चेतावनी: “समय आ गया है वास्तविक आकलन का”

लिंक्डइन पर वायरल हो रहे पोस्ट में समालोपनन फॉर्म हैं:

  1. “हमें अब एंटरप्राइजिता की सफलता को केवल फंडिंग या ब्रांड पहचान से दूर रखना चाहिए। हमें देखना होगा कि कंपनी वास्तव में लाभ पैदा कर रही है या नहीं।”

 

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भारतीय युवाओं को ऐसे स्ट्रेंथली को भी प्रेरणा के रूप में देखना चाहिए, बिना किसी बोल्ट के बूटस्ट्रैप्ड तरीके से, बिना बोल्टन में जाएं, प्रतिद्वंद्वियों बने हैं।

–निष्कर्ष :  एक जटिल लेकिन आवश्यक बहस

कुणाल शाह की प्रॉपर्टी और क्रेडिट के बारे में जो बहस बेकार है, वह सिर्फ एक व्यक्ति पर केंद्रित नहीं है। यह बहस भारत की वास्तुशिल्प संस्कृति, वैल्यूएशन मॉडल, उपभोक्ताओं की सोच और उद्यमिता के भविष्य पर है।

एक ओर, शाह जैसे प्रमुख भारत को ग्लोबल फिनटेक मार्केटप्लेस पर लेकर आए हैं। दूसरी ओर, कोलोराडो के इस अर्थशास्त्री ने आर्थिक अर्थशास्त्र और पाठ्यपुस्तक पर सवाल उठाए हैं।

 

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Swatantra Vani
Author: Swatantra Vani

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