करण औजला और हनी सिंह के गानों पर बवाल: पंजाब महिला आयोग की सख्त कार्रवाई

करण औजला और हनी सिंह के गानों पर बवाल: पंजाब महिला आयोग की सख्त कार्रवाई

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करण औजला और हनी सिंह के गानों पर बवाल: पंजाब महिला आयोग की सख्त कार्रवाई, 11 अगस्त को सुनवाई

पंजाबी संगीत जगत के दो बड़े सितारे, करण औजला और हनी सिंह, इन दिनों सुर्खियों में हैं। वजह है उनके गानों में महिलाओं के प्रति कथित तौर पर आपत्तिजनक बोल।पंजाब राज्य महिला आयोग ने इन दोनों कलाकारों को नोटिस जारी करते हुए 11 अगस्त 2025 को व्यक्तिगत रूप से हाज़िर होने का निर्देश दिया है। यह विवाद करण औजला के गीत एमएफ गबरू और हनी सिंह के मिलियनेयर से जुड़ा है, जिन पर महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले बोल शामिल करने का आरोप है।

करण औजला और हनी सिंह के गानों पर बवाल: पंजाब महिला आयोग की सख्त कार्रवाई

करण औजला और हनी सिंह विवादों में क्यों हैं?

करण औजला का नया गाना एमएफ गबरू पिछले एक हफ्ते से सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है और इसे 3.4 करोड़ से ज़्यादा बार देखा जा चुका है। लेकिन इसकी लोकप्रियता के साथ-साथ इसके बोलों पर भी आपत्तियाँ उठ रही हैं। आलोचकों का कहना है कि गाने में महिलाओं के प्रति अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

दूसरी ओर, हनी सिंह का पुराना हिट गाना ‘मिलियनेयर‘ भी फिर से चर्चा में है। पंजाब महिला आयोग का कहना है कि इसके बोल भी महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध हैं और समाज में गलत संदेश फैलाते हैं।

पंजाब महिला आयोग की सख्त कार्रवाई

पंजाब महिला आयोग की अध्यक्ष राज लाली गिल ने मामले का संज्ञान लेते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि करण औजला और हनी सिंह के इन गानों में इस्तेमाल की गई भाषा महिलाओं का अपमान करती है और इस पर तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए।

आयोग:

  • पुलिस को 11 अगस्त, 2025 तक एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
  • आयोग ने आदेश दिया है कि दोनों गायक 11 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उसके समक्ष हाज़िर हों।
  • गीतों के बोलों को समाज में लैंगिक भेदभाव वाली सामग्री को सामान्य बनाने का एक उदाहरण बताया गया है।

राज लाली गिल ने कहा,

“संगीत एक शक्तिशाली सांस्कृतिक माध्यम है। इसका इस्तेमाल किसी भी वर्ग, खासकर महिलाओं को नीचा दिखाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।”

सोशल मीडिया पर बहस तेज़

  • करण औजला और हनी सिंह को नोटिस जारी होने की खबर आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई।
  • कई लोग पंजाब महिला आयोग की सख्ती का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि अब ऐसे गीतों पर लगाम लगनी चाहिए।
  • वहीं, कुछ प्रशंसकों का मानना है कि यह “रचनात्मक स्वतंत्रता” पर हमला है और कलाकारों को अपनी शैली में लिखने की आज़ादी होनी चाहिए।

करण औजला की प्रतिक्रिया

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करण औजला ने कहा है कि उनके गाने का उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था। उन्होंने स्वीकार किया कि अगर शब्दावली में अनजाने में कोई गलती हो जाती है, तो वह उसे बदलने के लिए तैयार हैं।

“गीत को समग्र सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। कभी-कभी गीत शैली का हिस्सा होते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य किसी की गरिमा को ठेस पहुँचाना नहीं होता,” – करण औजला।

हनी सिंह का पक्ष

हनी सिंह ने अपने बचाव में कहा है कि उनका गाना “मिलियनेयर” कलात्मक स्वतंत्रता का हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि इसमें किसी वर्ग विशेष का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था।

“गीतकार बहस छेड़ने के लिए लिखते हैं, लेकिन मेरा इरादा व्यक्तिगत रूप से अपमान करने का नहीं है,” – हनी सिंह।

मामले की अगली सुनवाई और संभावित परिणाम

अब नज़रें 11 अगस्त 2025 पर टिकी हैं, जब करण औजला और हनी सिंह को पंजाब महिला आयोग के सामने पेश होना है। इसी दिन पुलिस को भी इस मामले से जुड़ी अपनी जाँच रिपोर्ट आयोग को सौंपनी होगी।

संभावित परिणाम:

1. अगर गानों में आपत्तिजनक सामग्री साबित होती है, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

2. कलाकारों को गानों के बोल बदलने पड़ सकते हैं।

3. यह मामला पंजाबी संगीत उद्योग में एक नई मिसाल कायम कर सकता है, जिसमें महिलाओं की गरिमा का सम्मान एक मानक बन जाता है।

संगीत और सामाजिक ज़िम्मेदारी

यह विवाद सिर्फ़ करण औजला और हनी सिंह तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे संगीत उद्योग के लिए एक चेतावनी है। गाने करोड़ों लोगों, खासकर युवाओं तक पहुँचते हैं। ऐसे में कलाकारों की ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे ऐसा कंटेंट दें जो नकारात्मक सोच को बढ़ावा न दे।

करण औजला और हनी सिंह के गानों पर यह विवाद एक बार फिर दिखाता है कि कला और ज़िम्मेदारी एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। लोकप्रियता के साथ-साथ कलाकारों पर समाज को सकारात्मक संदेश देने का भी दबाव होता है। 11 अगस्त को होने वाली सुनवाई तय करेगी कि इस मामले का अंत कैसे होगा और क्या इससे पंजाबी संगीत उद्योग में कोई स्थायी बदलाव आएगा।

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Author: kamalkant

कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।