उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में खुलेंगे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय

उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में खुलेंगे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में खुलेंगे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय, वाराणसी समेत उद्यमियों को मिलेगी बड़ी राहत अब लाइसेंस और नवीनीकरण के लिए दूसरे जिलों में नहीं जाना पड़ेगा, रोजगार और औद्योगिक विकास को भी मिलेगा बढ़ावा

Varanasi : उत्तर प्रदेश सरकार ने औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि अब उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Uttar Pradesh Pollution Control Board – UPPCB) के क्षेत्रीय कार्यालय सभी 75 जिलों में खोले जाएंगे। इस फैसले से उद्यमियों, उद्योगपतियों, अस्पतालों और छोटे कारोबारियों को काफी राहत मिलेगी।

अब तक प्रदेश में केवल 28 जिलों में ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय संचालित थे, जिसके कारण उद्योगों को लाइसेंस, स्वीकृति या नवीनीकरण के लिए अन्य जिलों में जाना पड़ता था। लेकिन अब हर जिले में कार्यालय खुलने से यह प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और सरल हो जाएगी।

यह कदम राज्य में “Ease of Doing Business” को मजबूत करेगा और औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करेगा।

उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में खुलेंगे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय

Varanasi में खुलेगा नया क्षेत्रीय कार्यालय, पूर्वांचल को मिलेगा बड़ा लाभ

पूर्वांचल के औद्योगिक और चिकित्सा क्षेत्र के लिए यह खबर बेहद अहम है। अब Varanasi में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का नया क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किया जाएगा। इस कार्यालय के संचालन से जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली और भदोही जैसे आस-पास के जिलों के उद्यमियों को भी सुविधा मिलेगी।

पहले इन जिलों के व्यवसायियों को Varanasi या लखनऊ जैसे शहरों में दस्तावेज़ जमा करने और स्वीकृति लेने जाना पड़ता था। अब वे अपने ही जिले में सभी कार्य कर सकेंगे — चाहे वह नए उद्योग की स्थापना की अनुमति हो, प्रदूषण नियंत्रण लाइसेंस हो या नवीनीकरण की प्रक्रिया।

इससे न केवल समय और धन की बचत होगी बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कामकाज में भी तेजी आएगी।

तीन दशक बाद बड़ा सुधार: बढ़ेंगे पद और रोजगार के अवसर

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन डॉ. आर.पी. सिंह ने बताया कि यह सुधार लगभग 30 वर्षों बाद लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड की वर्तमान संरचना वर्ष 1995 के स्वीकृत पदों पर आधारित है, जो अब राज्य के औद्योगिक विस्तार के अनुरूप नहीं है।

सरकार ने निर्णय लिया है कि अब बोर्ड की संरचना में बड़े पैमाने पर Reforms (सुधार) किए जाएंगे। सभी जिलों में कार्यालय खुलने के साथ-साथ कर्मचारियों की संख्या लगभग दोगुनी की जाएगी।

इसके अलावा, मुख्य पर्यावरण अधिकारियों (Chief Environmental Officers) की संख्या भी 9 से बढ़ाकर 15 की जा रही है। इसका उद्देश्य है कि हर जिले में पर्यावरण मानकों की प्रभावी निगरानी हो सके और उद्योगों को समय पर स्वीकृतियां मिलें।

इन सुधारों से न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

अस्पतालों और उद्योगों पर सख्त निगरानी, बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन पर जोर

  • डॉ. सिंह ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब केवल उद्योगों पर ही नहीं, बल्कि अस्पतालों पर भी कड़ी निगरानी रखेगा।
  • सभी अस्पतालों को बायो-मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
  • अस्पतालों से अपील की गई है कि वे अपने चिकित्सा कचरे (Medical Waste) का वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल प्रबंधन करें, ताकि जल, मिट्टी और वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
  • साथ ही बोर्ड ने जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के साथ भी सहयोग बढ़ाया है, ताकि राज्य की पर्यावरण नीतियाँ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लागू हो सकें।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तेजी से हो रहा काम

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य के हर जिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कार्यालय स्थापित किया जाए। इसका उद्देश्य है कि उद्योगपतियों को अनावश्यक देरी या प्रशासनिक जटिलताओं से बचाया जा सके।

सरकार की मंशा है कि औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करते हुए पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

इसी के तहत सभी जिलों में जल्द ही कार्यालयों के लिए भवन, स्टाफ और बुनियादी ढांचे की व्यवस्था की जा रही है।

उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में खुलेंगे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय

वर्तमान में इन जिलों में हैं कार्यालय

फिलहाल उत्तर प्रदेश के जिन जिलों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय हैं, वे हैं –

गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, कानपुर, कानपुर देहात, झांसी, बांदा, प्रयागराज, सोनभद्र, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, बुलंदशहर, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, आजमगढ़, गोरखपुर, अयोध्या, बस्ती, वाराणसी, मुरादाबाद, बिजनौर और बरेली।

नई योजना के तहत जल्द ही बाकी जिलों में भी कार्यालय खोले जाएंगे।

यह भी पढ़ें – Varanasi का एक कैदी पांडेयपुर मानसिक चिकित्सालय से फरार

निष्कर्ष: विकास और पर्यावरण संरक्षण का संतुलन

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की यह नई पहल राज्य में औद्योगिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन — इन तीनों क्षेत्रों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

Varanasi, पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश के उद्योगपतियों को अब स्वीकृति और नवीनीकरण के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और निवेश माहौल को भी नई गति मिलेगी।

सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश को एक “स्वच्छ, सुरक्षित और औद्योगिक रूप से मजबूत राज्य” बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

खबरों के लाइव अपडेट और विस्तृत विश्लेषण के लिए स्वतंत्र वाणी पर बने रहें।

kamalkant
Author: kamalkant

कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।