ईरान ने अमेरिका के खिलाफ किया पलटवार : कतर और इराक में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले, अल उदैद एयरबेस रहा निशाने पर :
_________
मध्य पूर्व एक बार फिर युद्ध की चपेट में आता दिख रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने सोमवार को नया मोड़ ले लिया, जब ईरान ने कतर और इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। यह कार्रवाई ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों – नतांज, फोर्डो और इस्फ़हान पर अमेरिका के हमले के जवाब में की गई। यह घटना पहले से ही गरमाए हुए ईरान-इज़राइल युद्ध की पृष्ठभूमि में हुई है, जिसने वैश्विक स्तर पर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
🔹अल उदीद एयरबेस : हमले का मुख्य लक्ष्य –
कतर में अल उदीद एयरबेस पर ईरान द्वारा किया गया यह हमला बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। यहाँ लगभग 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और यह यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का अग्रिम मुख्यालय भी है।
ईरान के अनुसार, यह हमला ‘विजय की घोषणा’ अभियान का हिस्सा था और इसे “अमेरिकी आक्रामकता का शक्तिशाली जवाब” बताया गया। ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि यह हमला “विनाशकारी और शक्तिशाली” था और इसका उद्देश्य अमेरिका को यह संदेश देना था कि वह किसी भी हमले का जवाब दिए बिना नहीं रहेगा।
🔹ईरान की योजना और बयान :
ईरान की सर्वोच्च सुरक्षा परिषद ने एक बयान जारी कर कहा कि मिसाइलों की संख्या अमेरिका द्वारा उसके परमाणु ठिकानों पर गिराए गए बमों के बराबर थी। इससे संकेत मिलता है कि ईरान का इरादा बदला लेने के साथ-साथ रणनीतिक संतुलन बनाए रखना था।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा:
- “हमने युद्ध शुरू नहीं किया, लेकिन हम किसी भी आक्रामकता का जवाब देने से पीछे नहीं हटेंगे।”
साथ ही, ईरान के सशस्त्र बलों के प्रमुख जनरल अब्दुल रहीम मौसवी ने कहा:
- “यह अपराध और अपमान अब चुपचाप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम अमेरिका की इस बड़ी गलती का कठोर जवाब देंगे।”
🔹कतर की प्रतिक्रिया : कूटनीति और सुरक्षा संतुलन
क्षेत्र में कूटनीतिक वार्ता का अहम केंद्र रहे कतर ने ईरान के हमले की कड़ी निंदा की है। कतर सरकार ने एक बयान में कहा कि देश की वायु रक्षा प्रणाली ने मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक दिया और कोई हताहत नहीं हुआ।
कतर ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी मिसाइलों को जानबूझकर शहरी क्षेत्रों और नागरिक आबादी से दूर गिराया गया था, जो दर्शाता है कि ईरान ने कतर को युद्ध का हिस्सा नहीं बनाया बल्कि अमेरिका को निशाना बनाया।
कतर ने कुछ घंटों के लिए अपना हवाई क्षेत्र भी बंद कर दिया, जिसे बाद में शाम को फिर से खोल दिया गया। दोहा में अमेरिकी दूतावास ने भी कुछ समय के लिए ‘शेल्टर इन प्लेस’ आदेश जारी किया, जिसे बाद में हटा लिया गया और बताया गया कि दूतावास मंगलवार से सामान्य रूप से काम करेगा।
🔹अमेरिका की स्थिति और डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया :
ईरान के हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तुरंत व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम पहुंचे और पूरी स्थिति पर नजर रखी। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने लिखा:
- “हमले के बारे में हमें पहले से सूचित करने के लिए ईरान का धन्यवाद। यह बहुत ही कमजोर हमला था।”
ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर ईरान ने आगे कोई हमला किया तो अमेरिका और भी ज़्यादा मज़बूती से जवाब देगा।
हालांकि, बाद में व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ट्रंप युद्ध को रोकना चाहते हैं और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बातचीत के ज़रिए समझौता करना चाहते हैं।
> “हम और युद्ध नहीं चाहते, हम समझौता चाहते हैं।”
🔹इराक में अमेरिकी बेस को भी निशाना बनाया गया
ईरान ने इराक के ऐन अल-असद एयरबेस को भी निशाना बनाया, जहां अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। इराकी सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि इस हमले में भी कोई नुकसान नहीं हुआ। ईरान के सरकारी टेलीविज़न पर मार्शल म्यूज़िक के साथ इसे “शक्तिशाली और सफल जवाब” बताया गया।
🔹ईरान-इजरायल युद्ध : तनाव और बढ़ा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच, ईरान-इजरायल युद्ध भी तेज़ होता जा रहा है। इजरायल ने तेहरान में कई महत्वपूर्ण सरकारी ठिकानों पर बमबारी की, जिसमें कुख्यात एविन जेल भी शामिल है, जहां राजनीतिक कैदियों और विदेशी नागरिकों को रखा जाता है।
🔹इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने कहा :
“हमने शासन के ठिकानों और दमनकारी संस्थानों पर अभूतपूर्व हमले किए हैं।” ईरान की न्यायपालिका ने पुष्टि की है कि एविन जेल पर हमला किया गया था, लेकिन स्थिति “नियंत्रण में” है। अमेरिकी सैन्य प्रतिक्रिया और कूटनीतिक संकेत अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, अल उदीद एयरबेस पर हुए हमले में कोई भी अमेरिकी सैनिक घायल नहीं हुआ। मिसाइलें छोटी और मध्यम दूरी की थीं, जिनमें से 13 को मार गिराया गया और 1 मिसाइल खाली इमारत में जा गिरी। व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया से यह भी स्पष्ट होता है कि अमेरिका अभी कूटनीतिक रास्ता अपनाना चाहता है, लेकिन वह अपने सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
🔹निष्कर्ष: क्या पश्चिम एशिया युद्ध की ओर बढ़ रहा है ?
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव और ईरान-इजराइल युद्ध की पृष्ठभूमि ने एक बार फिर पश्चिम एशिया को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है। अल उदीद एयरबेस पर हमला न केवल एक सैन्य कार्रवाई है, बल्कि एक भू-राजनीतिक चेतावनी भी है। कतर, जिसे अनिच्छा से संघर्ष में घसीटा गया है, एक बार फिर शांति वार्ता की मेज पर आ सकता है। अंततः यह देखना बाकी है कि डोनाल्ड ट्रम्प और वैश्विक कूटनीति इस भ्रम को नियंत्रित करने में सफल होते हैं या फिर यह एक और विनाशकारी युद्ध का रूप ले लेगा।
Author: Swatantra Vani
“स्वतंत्र वाणी” – जहाँ सच की आवाज़ कभी दबती नहीं। स्वतंत्र वाणी एक स्वतंत्र ऑनलाइन समाचार और ब्लॉग मंच है, जिसका उद्देश्य है पाठकों तक सही, निष्पक्ष और ताज़ा जानकारी पहुँचाना। यहाँ राजनीति, शिक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य, मनोरंजन, खेल और लाइफ़स्टाइल से जुड़ी हर महत्वपूर्ण ख़बर और जानकारी आसान भाषा में प्रस्तुत की जाती है। हम मानते हैं कि सच्चाई कभी दबाई नहीं जा सकती, इसलिए हमारा हर लेख और ख़बर तथ्यों पर आधारित होती है, ताकि पाठकों तक भरोसेमंद और निष्पक्ष पत्रकारिता पहुँच सके।










