असम गायिका हजारिका : असम गायिका के असामयिक निधन पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा समेत पूरे राज्य में शोक की लहर
असम संगीत जगत में अपनी अमिट पहचान बना चुकीं गायत्री हजारिका अब हमारे बीच नहीं रहीं। 16 मई 2025 को 44 साल की उम्र में गुवाहाटी के नेमकेयर अस्पताल में उनका निधन हो गया। गायत्री हजारिका पिछले दो सालों से कोलन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। असमिया गायिका के तौर पर उनकी लोकप्रियता और संगीत में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा समेत कई नामचीन हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है।

असम गायिका हजारिका: असम गायिका का प्रेरक सफर
गायत्री हजारिका का जन्म असम में हुआ था और उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा टीसी हायर सेकेंडरी स्कूल, गुवाहाटी से पूरी की। बाद में उन्होंने कोलकाता के हांडिक गर्ल्स कॉलेज और रवींद्र भारती और लखनऊ के भातखंडे म्यूजिक कॉलेज से संगीत की औपचारिक शिक्षा प्राप्त की। गायत्री हजारिका ने 11 साल की उम्र में असमिया गायिका के तौर पर मंच पर गाना शुरू किया था। उनके गीतों में असम की संस्कृति, भावनाएं और परंपराएं झलकती थीं, जिससे वे सभी वर्गों के श्रोताओं के बीच लोकप्रिय थीं।
असम गायिका हजारिका के यादगार गीत
गायत्री हजारिका ने असमिया गायिका के तौर पर कई हिट गाने दिए। ‘सारा पाते पाते फागुन नामे’, ‘रति रति मोर सोन’ और ‘आहार दराई ओभोति अंतरी गला’ जैसे गीतों ने उन्हें असमिया संगीत प्रेमियों के दिलों में अमर कर दिया। उनकी आवाज में ऐसी मिठास थी जो सीधे दिल तक पहुंचती थी। असमिया गायिका के तौर पर उनका योगदान सिर्फ मनोरंजन तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने असम की सांस्कृतिक विरासत को भी आगे बढ़ाया।
असम गायिका हजारिका के निधन पर हिमंत विश्व शर्मा की श्रद्धांजलि
गायत्री हजारिका के निधन की खबर मिलते ही असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने ट्वीट किया, “गायत्री हजारिका की भावपूर्ण आवाज और असमिया संगीत में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।” हिमंत बिस्वा सरमा ने गायत्री हजारिका के परिवार और उनके प्रशंसकों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की। मुख्यमंत्री का यह संदेश असमिया गायिका के प्रति राज्य की भावनाओं को दर्शाता है।
असम गायिका गायत्री हजारिका की संगीत विरासत
असमिया गायिका के रूप में गायत्री हजारिका की संगीत यात्रा प्रेरणादायक रही है। उन्होंने पारंपरिक असमिया धुनों को समकालीन शैली के साथ मिलाकर एक नया रंग दिया। एक असमिया गायिका के रूप में, उनके गायन में लोक और आधुनिकता का एक सुंदर मिश्रण था। उनके गीतों ने न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत में लोकप्रियता हासिल की। गायत्री हजारिका की आवाज़ आज भी विंक म्यूज़िक, गाना जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सुनी जा सकती है, जिससे उनकी लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
असम गायिका के निधन पर सोशल मीडिया पर शोक की लहर
असमिया गायिका के रूप में गायत्री हजारिका के निधन की खबर फैलते ही उनके प्रशंसकों और साथी कलाकारों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। हज़ारों लोगों ने उनके गीतों की यादें साझा कीं और लिखा कि असमिया गायिका की आवाज़ ने उनके जीवन को छू लिया। हिमंत बिस्वा सरमा के अलावा कई अन्य राजनेताओं, कलाकारों और आम लोगों ने भी गायत्री हजारिका के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।
गायत्री हजारिका : असम गायिका का निजी जीवन और संघर्ष
गायत्री हजारिका का निजी जीवन भी संघर्षों से भरा रहा। असमिया गायिका के रूप में अपनी पहचान बनाने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। वह पिछले दो सालों से कोलन कैंसर से जूझ रही थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने संगीत से अपना नाता नहीं तोड़ा। असमिया गायिका के रूप में उनका जुनून और समर्पण आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
हिमंत बिस्वा सरमा और असम गायिका के परिवार की संवेदनाएं
गायत्री हजारिका के परिवार में उनके पति और दो बेटे हैं। हिमंत बिस्वा सरमा ने उनके परिवार को सांत्वना देते हुए कहा कि असमिया गायिका के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री के संदेश ने असमिया गायिका के परिवार को आश्वस्त किया कि राज्य उनके साथ है और गायत्री हजारिका की यादें हमेशा जीवित रहेंगी।
असम गायिका का अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि सभा
गायत्री हजारिका का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए गुवाहाटी स्थित AASU मुख्यालय में रखा गया, जहां असमिया गायिका के प्रशंसकों और शुभचिंतकों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। नबाग्रह श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। हिमंत बिस्वा शर्मा समेत कई प्रमुख हस्तियों ने असमिया गायिका को श्रद्धांजलि दी।
असम गायिका के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा
असमिया गायिका के तौर पर गायत्री हजारिका द्वारा दिया गया योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है। हिमंत बिस्वा शर्मा ने यह भी कहा कि असमिया गायिका की भावपूर्ण आवाज और संगीत में योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। गायत्री हजारिका की संगीत विरासत, उनकी मधुर आवाज और उनके गीत असमिया संस्कृति को समृद्ध करते रहेंगे।
निष्कर्ष : असम गायिका गायत्री हजारिका की अमर विरासत
गायत्री हजारिका को असमिया गायिका के तौर पर जाना जाना हमेशा गर्व की बात रहेगी। हिमंत बिस्वा शर्मा समेत पूरे असम ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। असमिया गायिका के रूप में उनकी संगीत यात्रा, संघर्ष और समर्पण हर संगीत प्रेमी के लिए प्रेरणा है।वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन एक असमिया गायिका के रूप में उनकी आवाज़ और योगदान हमेशा ज़िंदा रहेगा। ओम शांति।
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Author: Swatantra Vani
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