असम की अधिकारी Nupur Bora पर बड़ी कार्रवाई: ₹2 करोड़ नकद और सोना ज़ब्त, हिमंत बिस्वा सरमा बोले- “400 गुना ज़्यादा संपत्ति”
असम में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत सोमवार को एक बड़ा खुलासा हुआ। असम सिविल सेवा (ACS) अधिकारी Nupur Bora को आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह कार्रवाई लंबी निगरानी का नतीजा है और आरोपी अधिकारी से बरामद संपत्ति उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से 400 गुना ज़्यादा है।

Nupur Bora कौन हैं?
Nupur Bora का जन्म 1989 में असम के गोलाघाट ज़िले में हुआ था। उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और कुछ समय तक ज़िला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) में व्याख्याता के रूप में कार्यरत रहीं। इसके बाद, 2019 में, वह असम सिविल सेवा में शामिल हुईं।
उनकी पहली नियुक्ति कार्बी आंगलोंग ज़िले में सहायक आयुक्त के रूप में हुई थी। उन्होंने जून 2023 तक यहाँ सेवा की। इसके बाद उन्हें बारपेटा ज़िले में सर्किल ऑफिसर के पद पर भेजा गया और फिर वर्तमान में वे कामरूप ज़िले के गोराईमारी में सर्किल ऑफिसर के पद पर तैनात हैं।
छापेमारी में क्या मिला?
सोमवार सुबह मुख्यमंत्री के विशेष सतर्कता प्रकोष्ठ ने गुवाहाटी स्थित Nupur Bora के घर पर छापा मारा। वहाँ से 92 लाख रुपये नकद और लगभग 1 करोड़ रुपये के गहने ज़ब्त किए गए।
इसके अलावा, बारपेटा ज़िले में उनके किराए के घर से 10 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए। सतर्कता प्रकोष्ठ की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रोज़ी कलिता ने बताया कि यह अब तक का सबसे बड़ा नकदी ज़ब्ती का मामला है।
पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि Nupur Bora के नाम पर गुवाहाटी में दो प्लॉट और तीन फ्लैट पंजीकृत हैं।
हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस कार्रवाई पर कहा
“Nupur Bora ने अपनी आय से 400 गुना ज़्यादा संपत्ति अर्जित की थी। इस मामले में सिर्फ़ निलंबन या बर्खास्तगी ही काफ़ी नहीं है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि क़ानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें कड़ी सज़ा मिले।”
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार पिछले छह महीनों से इस अधिकारी पर नज़र रख रही थी क्योंकि उन्हें ज़मीन के सौदों में भारी अनियमितताएँ करने की शिकायतें मिली थीं।

ज़मीन घोटाले और विवाद
Nupur Bora पर बारपेटा ज़िले में अपनी तैनाती के दौरान कई हिंदू परिवारों की ज़मीनें पैसे के बदले संदिग्ध लोगों को हस्तांतरित करने का आरोप है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा –
“जब यह अधिकारी बारपेटा में थीं, तब उन्होंने पैसे के बदले हिंदुओं की ज़मीनें संदिग्ध लोगों को हस्तांतरित कर दीं। इसीलिए वह हमारी निगरानी में थीं और आज कार्रवाई की गई।”
राज्य सरकार का दावा है कि राजस्व विभाग के सर्किल अधिकारी अक्सर असम के अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं।
‘मियाँ’ से संबंध का आरोप
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, Nupur Bora पर सरकारी और सत्रा की ज़मीन कुछ संदिग्ध “मियाँ” बाशिंदों के नाम करवाने का आरोप है।
असम में “मियाँ” शब्द बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। भाजपा का आरोप है कि ये लोग अवैध प्रवासी हैं और असम की जनसांख्यिकी के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।
सहयोगी पर भी छापा
विशेष सतर्कता दल ने Bora के कथित सहयोगी लाट मंडल सुरजीत डेका के घर पर भी छापा मारा। वह बारपेटा राजस्व मंडल कार्यालय में कार्यरत है।
उस पर Bora की मिलीभगत से ज़मीन खरीदने और अवैध हस्तांतरण करवाने का आरोप है।
रिश्वतखोरी का ‘रेट कार्ड’
स्थानीय संगठन कृषक मुक्ति संग्राम समिति (KMSS) ने भी Nupur Bora के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में कहा गया है कि उन्होंने भूमि सेवाओं के लिए एक ‘रेट कार्ड’ बना रखा था –
- नक्शा उपलब्ध कराने के लिए ₹1,500
- भूमि अभिलेखों में नाम बदलवाने के लिए ₹2 लाख तक की रिश्वत ली गई।
अब तक की कार्रवाई
- Nupur Bora को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
- मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि इस मामले में अन्य लोग भी पूछताछ के दायरे में आएंगे।
- विजिलेंस सेल ने भी कहा है कि यह अब तक की सबसे बड़ी नकदी बरामदगी है।
- फिलहाल, नूपुर बोरा न्यायिक हिरासत में हैं और जाँच जारी है।
भ्रष्टाचार पर कड़ी निगरानी
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार कहते रहे हैं कि उनकी सरकार असम को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए सख्त कदम उठा रही है। इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राजस्व विभाग के कई अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।
उन्होंने जनता से अपील की कि अगर कोई अधिकारी रिश्वत मांगता है तो तुरंत सरकार को इसकी सूचना दें।
अन्य हालिया विवाद
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में महाराष्ट्र की आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर को फर्जी पहचान और संपत्ति छिपाने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था।
अब Nupur Bora का मामला असम की नौकरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर कर रहा है।
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निष्कर्ष
असम की अधिकारी Nupur Bora का मामला दर्शाता है कि कुछ ही वर्षों की सेवा में अधिकारी करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति जमा कर सकते हैं।
92 लाख रुपये नकद, करोड़ों रुपये के आभूषण और ज़मीन-जायदाद की बरामदगी से साफ़ पता चलता है कि उन्होंने अपनी नौकरी का दुरुपयोग किया।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और राज्य सरकार इस मामले को कैसे आगे बढ़ाते हैं और क्या इस भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुँचा जा सकता है।
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Author: kamalkant
कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।










