दिग्गज मराठी अभिनेत्री ज्योति चंदेकर का 68 वर्ष की आयु में निधन, बेटी तेजस्विनी पंडित ने दी जानकारी
प्रसिद्ध मराठी फिल्म और टीवी अभिनेत्री ज्योति चंदेकर का 16 अगस्त 2025 की शाम को निधन हो गया। 68 वर्षीय ज्योति चंदेकर कुछ समय से बीमार थीं और लंबी उम्र से संबंधित बीमारी से जूझ रही थीं। उनके निधन की खबर उनकी बेटी और लोकप्रिय मराठी अभिनेत्री तेजस्विनी पंडित ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। इस दुखद खबर ने पूरे मराठी मनोरंजन जगत को दुखी कर दिया है।
बेटी तेजस्विनी पंडित ने दी खबर
ज्योति चंदेकर की बेटी तेजस्विनी पंडित ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर अपनी माँ की एक तस्वीर साझा की और लिखा –
“यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि हमारी प्यारी माँ और सबकी पसंदीदा अभिनेत्री ज्योति चंदेकर अब हमारे बीच नहीं रहीं। उनका अंतिम संस्कार 17 अगस्त को सुबह 11 बजे पुणे के नवी पेठ स्थित वैकुंठ श्मशान घाट पर किया जाएगा।”
सोशल मीडिया पर यह पोस्ट आते ही प्रशंसकों और इंडस्ट्री से जुड़े सितारों ने शोक संदेश भेजने शुरू कर दिए।
ज्योति चांदेकर लंबे समय से बीमार थीं।
हालांकि उनके निधन का आधिकारिक कारण अभी तक सामने नहीं आया है, लेकिन खबरों के अनुसार, वह कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों का इलाज करा रही थीं। इलाज के बावजूद, उन्होंने 16 अगस्त को पुणे में अंतिम सांस ली।

मराठी फिल्म, टीवी और नाटक जगत से जुड़े कलाकार लगातार उन्हें याद कर रहे हैं और श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
टीवी धारावाहिक “थरला तार मग” से मिली थी खास पहचान
टीवी दर्शक ज्योति चांदेकर को खास तौर पर “थरला तार मग” में निभाए गए उनके किरदार पूर्णा आजी के लिए याद करते हैं। इस किरदार ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया था।
स्टार प्रवाह चैनल ने भी आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर उन्हें याद करते हुए लिखा –
“सबकी प्यारी ‘पूर्णा आजी’, ज्योति चांदेकर को श्रद्धांजलि।”
फ़िल्मी सफ़र – “मी सिंधुताई सपकाल” से “तीचा उम्बरथा” तक
ज्योति चांदेकर का फ़िल्मी करियर लगभग पाँच दशकों तक फैला। उन्होंने छोटी उम्र से ही अभिनय करना शुरू कर दिया था।
उन्होंने 2010 की लोकप्रिय फ़िल्म “मी सिंधुताई सपकाल” में सिंधुताई की माँ की भूमिका निभाई। इस फ़िल्म को समीक्षकों और दर्शकों, दोनों ने खूब सराहा और ज्योति के अभिनय की खूब तारीफ़ हुई।

इसके अलावा, वह “गुरु” (2016), “देवा एक अतरंगी” (2017), “तीचा उम्बरथा“, “धर्मकन्या“, “ढोलकी“, “पौलवाट“, “सोजर्नर” जैसी कई फ़िल्मों का अहम हिस्सा रहीं।
उन्होंने “तुझा माझा ब्रेकअप“, “तू सुखकर्ता“, “छतरीवाली” और “तू सौभाग्यवती हो” जैसे टीवी धारावाहिकों में भी यादगार भूमिकाएँ निभाईं।
उनके अभिनय की ख़ासियत हर किरदार को पूरी ईमानदारी और गहराई से निभाना था।
बेटी तेजस्विनी पंडित के साथ स्क्रीन शेयर की
ज्योति चंदेकर की बेटी तेजस्विनी पंडित भी मराठी फिल्म जगत की एक जानी-मानी अभिनेत्री हैं।
दोनों ने 2015 में आई फिल्म “तिचा उम्बरथा” में साथ काम किया था। ज्योति ने इस फिल्म में अपनी बेटी की सास का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उनके शानदार अभिनय के लिए माँ-बेटी की जोड़ी को खूब सराहना मिली।
रंगमंच से सिनेमा तक का सफर
ज्योति चंदेकर ने अपने करियर की शुरुआत मराठी नाटकों से की थी। धीरे-धीरे वह रंगमंच से फिल्मों और फिर टीवी की दुनिया में आ गईं। उनका अभिनय सफर लगभग 50 वर्षों का रहा।
कला के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण ने उन्हें मराठी सिनेमा और रंगमंच जगत में एक सम्मानित स्थान दिलाया।
पुरस्कार और सम्मान
ज्योति चंदेकर को अपने लंबे करियर के दौरान कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें बाल गंधर्व जीवन गौरव पुरस्कार भी मिला। यह सम्मान अभिनय में उनके योगदान और उत्कृष्टता का प्रमाण है।
पुणे में होगा अंतिम संस्कार
ज्योति चांदेकर का अंतिम संस्कार 17 अगस्त, 2025 को सुबह 11 बजे पुणे के नवी पेठ स्थित वैकुंठ श्मशान घाट पर किया जाएगा। इस अवसर पर मराठी फिल्म और टीवी जगत के कई बड़े कलाकारों के आने की उम्मीद है।
उद्योग में शोक की लहर
- उनके निधन की खबर से पूरा मराठी फिल्म उद्योग सदमे में है।
- कई निर्देशकों ने कहा कि ज्योति चांदेकर का जाना मराठी रंगमंच और सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
- उनके सह-कलाकारों ने सोशल मीडिया पर यादें साझा करते हुए लिखा कि “ज्योति ताई हर किरदार में जान डाल देती थीं।”
- प्रशंसक भी लगातार कमेंट्स और पोस्ट के ज़रिए उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
ज्योति चांदेकर कौन थीं?
- जन्म: वर्ष 1957
- करियर की शुरुआत: 12 साल की उम्र से अभिनय
- क्षेत्र: मराठी रंगमंच, टेलीविजन और सिनेमा
- प्रमुख फ़िल्में: मी सिंधुताई सपकाल, गुरु, तिचा उम्बरथा, ढोलकी, पौलवट
- लोकप्रिय टीवी धारावाहिक: थरला तार मग, तुझा माझा ब्रेकअप, तू सुखकर्ता
- पुरस्कार: बाल गंधर्व जीवन गौरव
ज्योति चांदेकर ने अपने जीवन के लगभग 50 वर्ष मराठी फ़िल्मों, टीवी और रंगमंच को समर्पित किए। उनकी सहजता, अभिनय की गहराई और किरदारों को जीने के अंदाज़ ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई।
उनका जाना मराठी कला जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। लेकिन उनका योगदान और यादगार किरदार आने वाले समय में दर्शकों के दिलों में ज़िंदा रहेंगे।
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Author: kamalkant
कमल कांत सिंह एक उत्साही पत्रकार और लेखक हैं, जिन्हें समाचार और कहानी कहने का गहरा जुनून है। कई वर्षों के अनुभव के साथ, वे सामाजिक मुद्दों, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं पर गहन विश्लेषण और आकर्षक लेखन के लिए जाने जाते हैं। कमल का उद्देश्य अपने लेखन के माध्यम से सच्चाई को उजागर करना और पाठकों को प्रेरित करना है। उनकी लेखनी में स्पष्टता, विश्वसनीयता और मानवीय संवेदनाओं का समावेश होता है, जो उन्हें एक विशिष्ट आवाज प्रदान करता है।










